नगर निकाय चुनाव परिणाम से भाजपा में उत्साह, सत्ताधारी गठबंधन के प्रदर्शन पर उठे सवाल
रांची: नगर निकाय चुनाव के परिणाम आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद अब निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन से भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश पैदा हुआ है। पार्टी का दावा है कि नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में बड़ी संख्या में उसके विचारधारा से जुड़े उम्मीदवारों की जीत हुई है।
शनिवार को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू ने मीडिया से बातचीत करते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कथित तिकड़म, षड्यंत्र और सत्ता के दुरुपयोग के बावजूद निकाय चुनाव में सत्ताधारी गठबंधन को जनता ने नकार दिया है। उन्होंने दावा किया कि वार्ड स्तर से लेकर विभिन्न निकायों तक भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को व्यापक जनसमर्थन मिला है।
आदित्य साहू ने कहा कि भाजपा ने चुनाव घोषणा के समय ही राष्ट्रवादी सोच और सेवाभावी कार्यकर्ताओं को आगे लाने की बात कही थी, और चुनाव परिणामों से स्पष्ट है कि जनता का झुकाव भाजपा की नीतियों और विचारधारा की ओर है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार शुरुआत में निकाय चुनाव कराने को इच्छुक नहीं थी, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं के न्यायालय से लेकर सड़क और सदन तक किए गए संघर्ष के कारण ही चुनाव संभव हो सका।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने का निर्णय मतदान को प्रभावित करने की कोशिश थी। रांची नगर निगम चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार रोशनी खलखो सहित अन्य प्रत्याशियों के बड़ी संख्या में वोट रद्द होने को उन्होंने सरकार की साजिश बताया। साथ ही पुलिस प्रशासन के दुरुपयोग, मतगणना प्रभावित करने और कई नगरों में भाजपा समर्थित विजयी उम्मीदवारों को हराने के प्रयास का भी आरोप लगाया।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आचार संहिता के दौरान सत्ताधारी दल के नेताओं द्वारा प्रेसवार्ता कर वोट मांगना और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। इसके बावजूद जनता ने सरकार की नीतियों को नकारते हुए भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को समर्थन दिया।
अंत में आदित्य साहू ने राज्य की जनता, भाजपा कार्यकर्ताओं और विजयी प्रत्याशियों को बधाई देते हुए कहा कि निकाय चुनाव परिणाम राज्य की राजनीति में बदलाव का संकेत है।



