रांची में AIOS मिड-टर्म सम्मेलन का समापन,हजारों नेत्र चिकित्सक हुए शामिल
रांची : होटल चाणक्य बीएनआर में तीन दिनों से चल रहे 5वें अखिल भारतीय नेत्र सम्मेलन का रविवार को भव्य समापन हुआ। अंतिम दिन कॉर्नियल रिकंस्ट्रक्शन, केराटोप्लास्टी, ग्लूकोमा प्रबंधन, ऑकुलोप्लास्टी और न्यूरो-ऑप्थल्मोलॉजी सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। सर्जरी के दौरान आने वाली जटिलताओं के समाधान पर भी विशेष सत्र हुआ। समापन समारोह में उत्कृष्ट शोध पत्र, पोस्टर और वीडियो प्रस्तुतियों के विजेताओं को सम्मानित किया गया।
ROP विशेषज्ञ डॉ. बिभूति कश्यप ने प्रीमैच्योर बच्चों की समय पर रेटिना जांच को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि आंखें सामान्य दिखने के बावजूद ROP हो सकता है और जांच में देरी से स्थायी दृष्टि हानि का खतरा रहता है। समय पर पहचान होने पर लेजर और अन्य आधुनिक उपचार से दृष्टि बचाने की संभावना रहती है।
डॉ. संतोष जी. होनावर ने बच्चों की आंखों में दिखाई देने वाली सफेद चमक को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी। यह रेटिनोब्लास्टोमा का संकेत हो सकता है।
ग्लूकोमा विशेषज्ञ डॉ. मनोज माथुर ने कहा कि ग्लूकोमा शुरुआती दौर में बिना लक्षण के दृष्टि को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने 40 वर्ष के बाद नियमित नेत्र जांच की सलाह दी। सम्मेलन में 1500 से अधिक विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।


