डिजिटल नवाचार से बदलेगी शिक्षक शिक्षा की दिशा : डॉ. मनीष रंजन
रांची। संतोष कॉलेज ऑफ टीचर्स ट्रेनिंग एंड एजुकेशन के आईक्यूएसी सेल की ओर से छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘ट्रांसफॉर्मिंग टीचर एजुकेशन थ्रू डिजिटल इनोवेशन’ रखा गया है। कार्यक्रम में शिक्षकों को डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के प्रभावी उपयोग की जानकारी दी जा रही है।
मुख्य अतिथि श्रीकृष्ण इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, झारखंड सरकार के निदेशक डॉ. मनीष रंजन ने कहा कि तकनीक शिक्षक का स्थान नहीं ले सकती, बल्कि शिक्षक की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकती है। उन्होंने डिजिटल तकनीक के माध्यम से शिक्षा को अधिक सुलभ, समावेशी और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने दीक्षा, निष्ठा, पीएम ई-विद्या, स्वयं सहित विभिन्न डिजिटल शैक्षिक पहलों तथा वैश्विक अध्ययनों का उल्लेख करते हुए शिक्षक शिक्षा में हो रहे बदलावों पर चर्चा की। साथ ही ओल चिकी लिपि, भाषिणी परियोजना, ब्लूम्स टैक्सोनॉमी, स्व-अधिगम और सहपाठी अधिगम जैसे विषयों को डिजिटल समावेशन से जोड़कर समझाया।
इस अवसर पर महाविद्यालय की त्रैमासिक पत्रिका ‘ज्ञान पीयूष’ का विमोचन भी किया गया। विशेषज्ञ सत्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के मानवशास्त्र एवं जनजातीय अध्ययन विभाग की डॉ. सीमा ममता मिंज ने ‘झारखंड की जनजातीय भाषाओं का डिजिटल समावेशन’ विषय पर व्यावहारिक एवं संवादात्मक सत्र लिया। उन्होंने प्रतिभागियों के सवालों का जवाब भी दिया।
एफडीपी में डिजिटल शिक्षाशास्त्र, जनरेटिव एआई, चैटजीपीटी, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, मिश्रित अधिगम और आधुनिक शैक्षिक तकनीकों के जिम्मेदार उपयोग पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। भारतीय ज्ञान परंपरा को बीएड पाठ्यक्रम से जोड़ने, राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन और शिक्षकों के राष्ट्रीय व्यावसायिक मानकों पर भी विशेषज्ञ सत्र होंगे।
संस्थान की डायरेक्टर डॉ. रश्मि ने कहा कि यह पहल शिक्षक शिक्षा में नवाचार और तकनीक के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने के साथ जनजातीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में समावेशी शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में प्राचार्या डॉ. शुभ्रा ठाकुर, विभिन्न महाविद्यालयों के फैकल्टी सदस्य और प्रशिक्षु शिक्षक उपस्थित रहे।


