नई बोरिंग नियमावली पर बोरवेल संचालकों ने जताई आपत्ति, कहा- आम लोगों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
रांची: बोरवेल ऑनर एंड एजेंट्स एसोसिएशन की ओर से रातू रोड स्थित विशालाक्षी बैंक्वेट हॉल में रांची नगर निगम द्वारा प्रस्तावित नई बोरिंग नियमावली को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रस्तावित नियमों से आम नागरिकों, बोरिंग एजेंटों और बोरिंग गाड़ी मालिकों को होने वाली संभावित परेशानियों और आर्थिक बोझ को लेकर चिंता जताई गई। एसोसिएशन के सदस्यों ने नियमावली को सरल और व्यवहारिक बनाने की मांग की।
बैठक में एसोसिएशन के संरक्षक केके गुप्ता ने कहा कि प्रस्तावित नई नियमावली के तहत बोरिंग कराने से पहले निगम से अनुमति लेना अनिवार्य किया जा रहा है। छोटे व्यास की घरेलू बोरिंग के लिए भी शुल्क निर्धारित किया गया है। 5000 वर्गफीट से कम क्षेत्र में घरेलू बोरिंग के लिए 2500 रुपये और इससे अधिक क्षेत्र के लिए 5000 रुपये शुल्क लेने का प्रस्ताव है। वहीं व्यावसायिक बोरिंग के लिए 1000 वर्गफीट क्षेत्र तक 5000 रुपये और इससे अधिक क्षेत्र के लिए प्रति वर्गफीट 10 रुपये शुल्क लेने की योजना है। उन्होंने कहा कि यह शुल्क आम लोगों के लिए काफी अधिक है और इससे लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार निगम के अधीक्षण अभियंता अथवा सहायक अभियंता द्वारा बोरिंग स्थल का निरीक्षण किए जाने के बाद ही करीब 4.5 इंच व्यास की छोटी बोरिंग की अनुमति दी जाएगी। एसोसिएशन का कहना है कि इससे बोरिंग कराने की प्रक्रिया जटिल हो जाएगी। सदस्यों ने आशंका जताई कि नियमों की जटिलता के कारण अनावश्यक परेशानी और अवैध राशि की मांग की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे महेश चंद्रा ने कहा कि प्रस्तावित नियम के तहत घर में बोरिंग कराने के लिए होल्डिंग नंबर जरूरी होगा, जबकि खाली जमीन पर बोरिंग के लिए जमीन से संबंधित दस्तावेज जमा करने होंगे। उन्होंने कहा कि रांची में बड़ी संख्या में ऐसे मकान हैं, जिनके पास होल्डिंग नंबर नहीं है। इसी तरह कई लोगों के पास जमीन से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में केवल दस्तावेजों की कमी के कारण लोगों को पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता से वंचित करना व्यवहारिक नहीं होगा।
एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष गगन शर्मा ने आरोप लगाया कि नई नियमावली अभी लागू भी नहीं हुई है, इसके बावजूद निगम की ओर से कुछ एजेंटों से बिना रसीद के पैसे की मांग किए जाने की शिकायत सामने आई है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों तक की जाएगी।
एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य सुनील तिवारी ने वाटर हार्वेस्टिंग की अनिवार्यता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण की व्यवस्था केवल नई बोरिंग कराने वालों पर लागू करने के बजाय सरकार और नगर निगम को सभी घरों के लिए व्यापक वाटर हार्वेस्टिंग योजना तैयार करनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सड़कों और नालियों के बीच उपलब्ध खाली जमीन का उपयोग कर वर्षा जल संचयन की व्यवस्था विकसित की जा सकती है, जिससे आसपास के घरों और सड़कों से बहने वाले पानी का भूजल स्तर बढ़ाने में इस्तेमाल हो सके।
बैठक में एसोसिएशन ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि जल्द ही एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्री, सांसद, विधायक, नगर निगम के महापौर, उपमहापौर, नगर आयुक्त, उप नगर आयुक्त, वार्ड पार्षद और अन्य संबंधित अधिकारियों से मुलाकात कर अपना पक्ष और सुझाव रखेगा। अगले सप्ताह प्रस्तावित नियमों से प्रभावित नागरिकों के साथ भी बड़ी बैठक आयोजित करने की योजना है।
एसोसिएशन ने कहा कि उसका उद्देश्य निगम की प्रस्तावित नियमावली का विरोध करना मात्र नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार कराने का प्रयास करना है, जो सरल, पारदर्शी और आम नागरिकों के लिए आर्थिक रूप से बोझमुक्त हो। बैठक में नियमों के उल्लंघन पर प्रस्तावित दंडात्मक कार्रवाई और उससे बचने के नाम पर होने वाले संभावित अवैध खर्च को रोकने के उपायों पर भी चर्चा की गई।
बैठक में राजेश प्रसाद, विनोद वर्मा, प्रदीप प्रसाद, मो. क्यूम अंसारी, मो. खान, मंटू कुमार, सुजीत तिवारी, मो. आरिफ, मो. रऊफ, जितेंद्र सिंह, अमरदीप सोनी, छोटू चौधरी, जितेंद्र कुमार, दीपू प्रजापति, प्रशांत कुमार, रुपेश कुमार, मनोज कुमार, मयंक राज, संपूर्ण प्रसाद, प्रकाश सिंह, संदीप सिंह, संतोष अस्थाना, मो. रेहान, रवि महली, मो. एजाज अंसारी, मो. तौसीफ, मो. तस्लीम, पिंटू सिंह, दीपक कुमार और अभय चौधरी सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।


