गैस वितरण में ग्रामीणों के साथ भेदभाव क्यों, 25 दिन शहर, 45 दिन गांव में : अरुण साबू

खूंटी : एलपीजी गैस की आपूर्ति सामान्य होने के बावजूद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गैस डिलीवरी की अवधि में अंतर को लेकर मुरहू के उप प्रमुख अरुण कुमार साबू ने केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय से सवाल उठाया है।
उन्होंने कहा कि अगर गैस की आपूर्ति अब सामान्य हो गई है तो शहरी उपभोक्ताओं को लगभग 25 दिनों में और ग्रामीण उपभोक्ताओं को लगभग 45 दिनों में गैस क्यों दी जा रही है? क्या ग्रामीण भारत के नागरिक नहीं हैं? क्या ग्रामीण परिवार गैस के लिए भुगतान और देश के विकास में अपना योगदान नहीं देते?
अरुण साबू ने कहा कि गैस संकट के समय ग्रामीण जनता ने सरकार का पूरा सहयोग किया। लोगों ने लकड़ी, इंडक्शन सहित अन्य विकल्पों का इस्तेमाल कर कठिन परिस्थितियों में सरकार का साथ दिया। लेकिन अब जब परिस्थितियां सामान्य हैं, तब ग्रामीणों को गैस के लिए इतनी लंबी प्रतीक्षा क्यों करनी पड़े?
उन्होंने कहा कि गांवों में परिवारों का आकार अक्सर शहरों से बड़ा होता है और एक ही परिवार में 4 से 6 सदस्य रहते हैं। ऐसे में ग्रामीण परिवारों को LPG की आवश्यकता कम नहीं है। इसके बावजूद अगर उन्हें 45 दिनों तक गैस के लिए इंतजार करना पड़े तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा, “हम ग्रामीण भी भारत के नागरिक हैं। हमें भी वही सुविधा और समान अधिकार मिलना चाहिए जो शहर के लोगों को मिल रहा है। गैस की आपूर्ति सामान्य है तो ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए भी डिलीवरी व्यवस्था सामान्य की जाए।”
उप प्रमुख ने भारत सरकार, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री तथा पेट्रोलियम मंत्रालय से मांग की है कि ग्रामीण एवं शहरी LPG वितरण व्यवस्था में हो रहे अंतर की तत्काल समीक्षा की जाए और ग्रामीण उपभोक्ताओं को भी समय पर गैस उपलब्ध कराने की व्यवस्था स

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