जेपीएससी-जेएसएससी भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती अभियान की ऐतिहासिक जीत, देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में निकली आभार यात्रा

रांची :झारखंड के छात्र आंदोलन और जेपीएससी-जेएसएससी भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती अभियान के तहत छात्रों को बड़ी सफलता मिलने के बाद आज आंदोलन के प्रमुख छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में आभार यात्रा निकाली गई। यह आभार यात्रा जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने शामिल होकर अपनी खुशी का इजहार किया।

आभार यात्रा के दौरान छात्रों ने अबीर-गुलाल खेलकर खुशियां मनाईं तथा जयपाल सिंह मुंडा जी और शहीद अल्बर्ट एक्का जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान छात्रों ने उत्साहपूर्वक नारे लगाए और आतिशबाजी कर अपनी खुशी जाहिर की।

छात्रों का कहना है कि यह झारखंड के छात्र आंदोलन के इतिहास की ऐतिहासिक और बड़ी जीत है। आंदोलन के परिणामस्वरूप 45 परीक्षाओं पर कार्रवाई हुई, जिनमें 22 परीक्षाएं रद्द, 17 परीक्षाओं में जांच और 6 परीक्षाएं स्थगित की गई हैं। छात्रों ने इसे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

इस सफलता के पीछे छात्रों का लंबा और लगातार संघर्ष रहा। देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में 2 जुलाई से संघर्ष की शुरुआत हुई, जो 47 दिनों तक चला। इसके बाद 5 जुलाई से आंदोलन की शुरुआत हुई, जो 44 दिनों तक चला।

25 जुलाई से बापू वाटिका में सत्याग्रह शुरू किया गया, जिसे बाद में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में स्थानांतरित किया गया। यह सत्याग्रह लगातार 24 दिनों तक चला।

इसके बाद 2 अगस्त से भूख हड़ताल शुरू हुई, जो 16 दिनों तक चली। इस दौरान देवेंद्र नाथ महतो के साथ कई छात्र-छात्राएं भी भूख हड़ताल में शामिल हुए और आंदोलन को मजबूती प्रदान की।

छात्रों का कहना है कि यह जीत किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सभी संघर्षरत छात्र-छात्राओं, अभ्यर्थियों और लंबे समय तक आंदोलन में डटे रहे हर साथी के सामूहिक संघर्ष की जीत है।

इस ऐतिहासिक परिणाम के बाद छात्रों द्वारा झारखंड सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति भी आभार व्यक्त किया गया। छात्रों ने उम्मीद जताई कि आगे भी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और अभ्यर्थियों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।

आभार यात्रा के माध्यम से छात्रों ने स्पष्ट संदेश दिया कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण संघर्ष के माध्यम से उठाई गई छात्रों की आवाज को मजबूती मिल सकती है। यह आंदोलन झारखंड के छात्र संघर्ष के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हुआ है।

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