बच्चों के शिक्षा के अधिकार के साथ साथ उनके हाथों से किताबें छीन रही हेमंत सरकार: राफिया नाज़

रांची : भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज़ ने कहा कि हेमंत सरकार ने झारखंड के बच्चों और युवाओं के भविष्य को पूरी तरह अनदेखा कर दिया है। सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक है। कहीं बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ रहे हैं, कहीं समय पर स्कूल ड्रेस नहीं मिल रही, हजारों विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति लंबित है और 7,500 से अधिक विद्यालय केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। आखिर यह कैसा शिक्षा मॉडल है?

उन्होंने कहा कि राज्य में 50 हजार से अधिक शिक्षक पद वर्षों से रिक्त हैं और यू-डायस के अनुसार झारखंड का छात्र-शिक्षक अनुपात राष्ट्रीय औसत से काफी खराब है। कई स्कूलों में एक ही शिक्षक पूरी पांच कक्षाओं की जिम्मेदारी निभा रहा है।अब जब शिक्षकों को एसआईआर जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व निभाने होंगे, तब पहले से शिक्षक विहीन विद्यालयों में पढ़ाई और प्रभावित होगी। इसके लिए कोई संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि हेमंत सरकार की नियुक्तियों में घोर लापरवाही जिम्मेदार है।

राफिया नाज़ ने कहा कि हजारों विद्यालय आज भी कक्षाओं, फर्नीचर, शौचालय, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सरकार ने हर वर्ष 5 लाख रोजगार देने का वादा किया था, लेकिन न शिक्षक नियुक्त हुए, न युवाओं को रोजगार या बेरोजगारी भत्ता मिला और न ही विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति।

उन्होंने कहा कि सरकार का रिपोर्ट कार्ड यही है…बच्चों के पास शिक्षक नहीं, युवाओं के पास रोजगार नहीं और विद्यार्थियों के पास छात्रवृत्ति नहीं। उन्होंने सवाल किया कि जब वर्षों से हजारों शिक्षक पद खाली थे, तो उन्हें भरा क्यों नहीं गया? क्या गरीब, आदिवासी, दलित और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार नहीं है?

उन्होंने मांग की कि 50 हजार रिक्त शिक्षक पदों पर तत्काल नियमित नियुक्ति की जाए, लंबित छात्रवृत्तियों का भुगतान हो, सभी विद्यार्थियों को समय पर ड्रेस, पुस्तकें और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा युवाओं से किए गए रोजगार और बेरोजगारी भत्ते के वादे पूरे किए जाएं। राफिया नाज़ ने कहा कि झारखंड के बच्चों को बहाने नहीं, शिक्षक चाहिए और युवाओं को भाषण नहीं, रोजगार चाहिए।

आखिर हेमंत सरकार इस राज्य को कहा लेकर जाना चाहती है

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