भागलपुर की एनसीसी कैडेट्स बनीं साइबर शक्ति, 10 दिनों के प्रशिक्षण ने बदली सोच, बढ़ा आत्मविश्वास

भागलपुर। डिजिटल युग में जहां एक तरफ दुनिया उंगलियों पर सिमट आई है, वहीं दूसरी तरफ साइबर अपराध एक नई चुनौती बनकर खड़ा है। इसी चुनौती को भांपते हुए भागलपुर के सुंदरवती महिला कॉलेज परिसर में पिछले 10 दिनों तक एक ऐसा माहौल बना रहा, जहाँ सैकड़ों एनसीसी की छात्राएँ न सिर्फ प्रशिक्षण ले रही थीं, बल्कि डिजिटल सुरक्षा की नई समझ गढ़ रही थीं। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के अंतर्गत आयोजित यह विशेष साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम अब समाप्त हो चुका है।लेकिन कैडेट्स के भीतर जगाई गई जागरूकता और आत्मविश्वास अब उनके साथ हमेशा चलने वाला है।

डर नहीं, जागरूकता, यही बना प्रशिक्षण का मंत्र

कार्यक्रम की मुख्य सोच थी – लड़कियां सिर्फ स्क्रॉल न करें, समझ भी विकसित करें। एनसीसी की इन युवा कैडेट्स को ‘अवेयरनेस एंबेसडर’ के रूप में तैयार किया गया ताकि वे अपने स्कूल, मोहल्ले और परिवार को भी साइबर खतरों से बचाने की राह दिखा सकें।

10 दिनों में कैडेट्स ने सीखा बहुत कुछ सीखा। साइबर बुलिंग और ऑनलाइन ट्रोलिंग का सामना कैसे करें, सिम स्वैपिंग और संदिग्ध चार्जिंग स्टेशनों का खतरा,एआई के जरिए फोटो में छेड़छाड़ कैसे होती है,क्यूआर कोड और यूपीआई फ्रॉड की पहचान, फेक प्लेटफॉर्म, लोन ऐप और सेक्सटॉर्शन से बचाव, इंटरनेट पर अपनी पहचान को सुरक्षित रखने की तकनीक जैसे गुर सीखी।

यह महज़ क्लासरूम व्याख्यान नहीं था। डेमो, केस स्टडी और रियल-टाइम उदाहरणों ने छात्राओं को साइबर अपराध की वास्तविकता से रूबरू करा दिया।

500 से अधिक छात्राएं – एक लक्ष्य: सुरक्षित डिजिटल भविष्य

17 नवंबर को शुरू हुए इस प्रशिक्षण में 47 बिहार बटालियन की 500 से अधिक एनसीसी छात्राओं ने हिस्सा लिया। साइबरक्राइम पुलिस इकाई के विशेषज्ञों ने कई जटिल विषयों को बेहद सहज भाषा में समझाया। छात्राओं ने भी उत्साह से सवाल पूछे – कई ने अपने अनुभव साझा किए, और कई ने पहली बार जाना कि ऑनलाइन दुनिया उतनी मासूम नहीं जितनी दिखती है।

‘लड़कियों को डिजिटल हथियारबंद करना जरूरी’ डीएसपी कनिष्क श्रीवास्तव

साइबर सेल के डीएसपी कनिष्क श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में साफ कहा – ‘साइबर अपराध सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं, सामाजिक खतरा है। लड़कियों को इससे बचाने के लिए उन्हें जागरूक और कानूनी तौर पर सक्षम बनाना बेहद जरूरी है।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि कैडेट्स सिर्फ खुद तक यह ज्ञान सीमित नहीं रखेंगी, बल्कि इसे घर-घर तक ले जाऊंगी। डिजिटल सुरक्षा की यह जिम्मेदारी अब इनके कंधों पर है और कैडेट्स ने भी इसे पूरी गंभीरता से स्वीकार किया।

एनसीसी के अधिकारियों का मार्गदर्शन – अनुशासन और जागरूकता का संगम

कर्नल जे. एस. राणा और वरिष्ठ प्रशिक्षक सीमा ने प्रशिक्षण के हर सत्र में यह सुनिश्चित किया कि छात्राएँ न केवल सीखें, बल्कि अपने व्यवहार में बदलाव भी लाएं। अनुशासन, सतर्कता और त्वरित प्रतिक्रिया। इन तीन मूल मंत्रों पर बार-बार ज़ोर दिया गया।

एक कार्यक्रम नहीं, बदलाव की शुरुआत

यह 10-दिवसीय प्रशिक्षण समाप्त जरूर हो गया, लेकिन इसका असर अब दिखने वाला है।भागलपुर की ये कैडेट्स अपने-अपने घरों, स्कूलों और मोहल्लों में वह आवाज़ बनकर उभरेंगी जो कहेगी -‘साइबर सुरक्षा कोई विकल्प नहीं, आवश्यकता है।’ साइबर अपराधों के बढ़ते अंधेरे के बीच एनसीसी की ये युवा लड़कियां अब उम्मीद की नई रोशनी बनकर सामने आई हैं। सशक्त, सजग और सुरक्षित डिजिटल भविष्य की वाहक।

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