अलका तिवारी ने संभाला झारखंड राज्य निर्वाचन आयुक्त का पदभार,नगर निकाय चुनाव जल्द होने की जगी उम्मीद
रांची: झारखंड सरकार की पूर्व मुख्य सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अलका तिवारी ने गुरुवार को राज्य निर्वाचन आयुक्त का पदभार ग्रहण किया। उनके पदभार संभालने के साथ ही झारखंड में नगर निकाय चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं। अब बहुत जल्द पिछले चार वर्षों से लंबित नगर निकाय का चुनाव अब जल्द होने की उम्मीद जगी है।
अलका तिवारी 1987 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की अधिकारी रही हैं और प्रशासनिक सेवा में अपने चार दशकों के लंबे कार्यकाल में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियाँ संभालीं। वे विभिन्न जिलों में उपायुक्त, कई विभागों में सचिव तथा केंद्र सरकार में भी महत्त्वपूर्ण पदों पर सेवाएँ दे चुकी हैं। हाल ही में वे झारखंड की मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुईं। मुख्य सचिव रहते हुए उन्होंने राज्य में विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग, पारदर्शी प्रशासन और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया था।
राज्य निर्वाचन आयुक्त का पदभार ग्रहण करने के बाद अलका तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और तकनीक-संपन्न बनाना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग आने वाले समय में आधुनिक तकनीक का अधिक उपयोग करेगा, जिससे मतदाता सूची, मतदान केंद्र और गिनती की प्रक्रिया को और सरल और पारदर्शी बनाया जा सके।
राज्य निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने नए आयुक्त का स्वागत किया। इस दौरान आयोग के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि अलका तिवारी के नेतृत्व में पंचायत चुनाव, नगर निकाय चुनाव और अन्य स्थानीय निकायों के चुनाव और अधिक व्यवस्थित व निष्पक्ष ढंग से सम्पन्न होंगे।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में उनकी नियुक्ति को सकारात्मक कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव और निष्पक्ष छवि से राज्य में चुनावी प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी। विशेषकर पंचायत और निकाय चुनावों में पारदर्शिता, मतदाता सूची में सुधार और मतदान प्रक्रिया को सहज बनाने की दिशा में उनकी भूमिका अहम रहेगी।
अलका तिवारी की नियुक्ति से यह भी संदेश गया है कि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अब देखना होगा कि उनके नेतृत्व में झारखंड निर्वाचन आयोग किस तरह नई तकनीक और बेहतर प्रशासनिक कार्यशैली के जरिए राज्य की चुनावी प्रणाली को और सशक्त बनाता



