झारखंड में सादगी से मना विश्व आदिवासी दिवस,नृत्य- संगीत स्थगित,पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने निधन और शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के गंभीर रूप से बीमार रहने पर लिया गया फैसला

रांची : आदिवासी बाहुल झारखंड प्रदेश में इस बार विश्व आदिवासी दिवस सादगी के साथ मनाया गया। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक नृत्य-संगीत के साथ मनाया जाने वाला यह दिवस पूरी तरह से उदासी रही । आदिवासियों के महानायक सह झारखंड अलग राज्य आंदोलन के अगुआ पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन से प्रदेश के कई आदिवासी संगठनों में शोक है। अपने प्रिय नेता के निधन पर दुखी हैं। राजधानी रांची के बिरसा मुंडा स्मृति पार्क में तीन दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम को भी स्थगित कर दिया गया है। यह कार्यक्रम झारखंड सरकार के द्वारा किया जाता था। इसमें देश के कई राज्यों से आदिवासी कलाकार और बुद्धिजीवियों का संगम होता था। इसके साथ ही तीन दिनों का मेला भी लगता था। इस मेले में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों के द्वारा उत्पादित शिल्पकला का प्रदर्शन किया जाता था। उन कलाकारों के एक मंच मिलता था। लेकिन इसबार ऐसा नहीं हो पाया। क्योंकि झारखंड सरकार के मुखिया हेमंत सोरेन अपने पिता पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शिबू सोरेन के श्राद्ध कर्म में हैं। दुख की इस घड़ी में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इसबार झंडोत्तोलन कार्यक्रम में भी शामिल नहीं होंगे। वे नेमरा गांव में श्राद्ध कर्म संपन्न कर 16 अगस्त को राजधानी रांची पहुंचेंगे।

कई आदिवासी संगठनों ने विश्व आदिवासी दिवस पर कोकर स्थित  बिरसा मुंडा समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दिया।

केन्द्रीय सारण समिति के अध्यक्ष बाबलू मुंडा ने कहा कि दिशुम गुरु के निधन से हम सभी आदिवासी लोग दुखी हैं। अलग राज्य झारखंड आंदोलन के महानायक आज हमलोगों के बीच नहीं रहे। इसके साथ ही झारखंड सरकार के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन की हालत भी गंभीर है। इनसब कारणों से इस बार हमलोग विश्व आदिवासी दिवस कार्यक्रम सादगी से मना रहे हैं।

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