बोकारो स्टील प्लांट ने सभी सभी नागरिकों एवं विस्थापितों से अपील की

बोकारो – बोकारो इस्पात संयंत्र केवल अपने कर्मचारियों की आजीविका का आधार ही नहीं, बल्कि पूरे बोकारो क्षेत्र के जनजीवन एवं आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ भी है। ठेका श्रमिक, आपूर्तिकर्ता, ट्रांसपोर्टर, छोटे व्यापारी, दुकानदार, सेवा प्रदाता तथा उनके परिवार—सभी अपनी आजीविका के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संयंत्र के सुचारु संचालन पर निर्भर हैं। यह सर्वविदित है कि आसपास के क्षेत्र का सामान्य जनजीवन तभी सुचारु रूप से चल सकता है, जब संयंत्र बिना किसी व्यवधान के संचालित हो।
10 अक्टूबर 2026 से विस्थापितगण प्रशासनिक भवन के सामने निर्धारित धरना स्थल पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। संयंत्र के मुख्य द्वार को छोड़कर अन्य सभी द्वारों को भी अवरुद्ध कर दिया गया है। प्रबंधन ने कहा कि विस्थापितों की भावनाओं का पूर्ण सम्मान करता हूं तथा भूख हड़ताल में शामिल सभी लोगों के स्वास्थ्य को लेकर अत्यंत चिंतित है। प्रबंधन उनसे भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह करता है।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के अधीन किसी भी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (सीपीएसई) में भर्ती भारत सरकार द्वारा निर्धारित नियमों एवं संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही की जाती है।वर्तमान गतिरोध के कारण आवश्यक कच्चे माल एवं अन्य सामग्रियों की आपूर्ति बाधित हो रही है, जिससे संयंत्र का संचालन प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहा है। बोकारो इस्पात संयंत्र एक थर्मल संवेदनशील (ताप-संवेदी) संयंत्र है। ऐसी परिस्थिति में संयंत्र एवं कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु प्रबंधन उत्पादन में कटौती करने के लिए बाध्य हो सकता है। इसके लिए कई महत्वपूर्ण उपकरण इकाइयों एवं सुविधाओं को बंद करना पड़ेगा। एक बार बंद होने के बाद इन इकाइयों को पुनः चालू करना अत्यंत कठिन, समयसाध्य एवं खर्चीला होगा, जिससे संयंत्र, इसके कर्मचारियों तथा पूरे क्षेत्र को दीर्घकालिक क्षति हो सकती है तथा संयंत्र एवं राज्य को वित्तीय हानि भी होगी।
वर्तमान स्थिति संयंत्र के भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।
अतः बीएसएल प्रबंधन सभी से अपील करता है कि वे इस गतिरोध को समाप्त करें तथा आपसी बातचीत के माध्यम से मामले का समाधान करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *