कार्डियाबीकॉन में विशेषज्ञों की अपील, दिल-किडनी और मेटाबॉलिज्म को एक साथ देखने पर जोर

रांची: कार्डियाबीकॉन झारखंड चैप्टर में देशभर से जुटे हृदय, मधुमेह और किडनी रोग विशेषज्ञों ने कार्डियो-रीनल-मेटाबॉलिक (सीकेएम) स्वास्थ्य को लेकर लोगों को जागरूक किया। सम्मेलन का विषय “कार्डियो-मेटाबॉलिक व रीनल स्वास्थ्य में समन्वित दृष्टिकोण” रहा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. अनिल कुमार विरमानी, डॉ. आशुतोष मिश्रा, डॉ. सुनील रुंगटा और डॉ. प्रज्ञा घोष पंत,डॉ एस कुमार विशेषज्ञों के विचार साझा किए।
विशेषज्ञों ने कहा कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय और किडनी की बीमारियों को अलग-अलग देखने के बजाय इनके आपसी संबंध को समझना जरूरी है। इसी आधार पर उपचार और रोकथाम की रणनीति तैयार की जानी चाहिए।
कार्डियाबीकॉन सोसाइटी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. आशुतोष मिश्रा ने “वाराणसी डिक्लेरेशन 2026” प्रस्तुत किया। इसे भारत की परिस्थितियों के अनुरूप कार्डियो-रीनल-मेटाबॉलिक स्वास्थ्य नीति संबंधी सलाह बताया गया। उन्होंने कहा कि डिक्लेरेशन 48 विशेषज्ञों की डेल्फी सहमति प्रक्रिया से गुजरी है और इसकी आठ प्रमुख सिफारिशों को 80 प्रतिशत से अधिक विशेषज्ञों की सहमति मिली है।
डॉ. अनिल विरमानी ने एलपी(ए) को अनुवांशिक रूप से प्रभावित रक्त-वसा तत्व बताते हुए कहा कि सामान्य कोलेस्ट्रॉल जांच में इसकी अलग से जांच नहीं होती। परिवार में कम उम्र में हृदय रोग या हार्ट अटैक का इतिहास होने पर चिकित्सकीय सलाह से इसकी जांच पर विचार किया जा सकता है।
डॉ. प्रज्ञा पंत ने कार्डियक सार्कोइडोसिस पर जानकारी देते हुए अनियमित धड़कन और सांस फूलने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी। विशेषज्ञों ने नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की।

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