कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 10 की बढ़ोतरी पर कांग्रेस ने की निंदा
रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में ₹10 की बढ़ोतरी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा की राजनीति अब धर्म की आड़ में सत्ता हासिल करने और सत्ता में आने के बाद जनता को महंगाई की आग में झोंकने तक सीमित रह गई है।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने भगवान राम के नाम पर देश की जनता से वोट मांगे, राम मंदिर के नाम पर करोड़ों लोगों की आस्था को राजनीतिक लाभ का माध्यम बनाया और अब राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर उठे सवालों पर जवाब देने से बच रही है। चुनावी रैलियों में बजरंगबली जैसे आराध्य को राजनीतिक प्रदर्शन का हिस्सा बनाया गया। क्या भाजपा के लिए भगवान राम और बजरंगबली केवल चुनाव जीतने के साधन हैं? क्या आस्था का सम्मान केवल सत्ता हासिल करने तक ही सीमित है?
राकेश सिन्हा ने कहा कि दीपावली और छठ जैसे पवित्र पर्वों से ठीक पहले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में ₹10 की बढ़ोतरी करना भाजपा सरकार की जनविरोधी और संवेदनहीन सोच को दर्शाता है। त्योहारों के समय आम परिवार अपने घर में खुशियां लाने की तैयारी करता है, लेकिन भाजपा सरकार महंगाई का बोझ बढ़ाकर उनकी खुशियों पर ग्रहण लगाने का काम कर रही है।
कमर्शियल सिलेंडर की कीमत बढ़ने से छोटे दुकानदारों, होटल संचालकों, ठेला-खोमचा चलाने वालों और छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ेगी। इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा। त्योहारों के समय मिठाई, नाश्ता और भोजन तक महंगा होने की आशंका बढ़ेगी। ऐसे में सवाल है कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार आखिर त्योहार मनाएं या महंगाई से लड़ें?
उन्होंने कहा कि भाजपा को यह बताना चाहिए कि भगवान राम का नाम लेने से जनता की रसोई का खर्च कम क्यों नहीं होता? बजरंगबली के नाम पर राजनीति करने वालों को महंगाई के खिलाफ जनता की आवाज क्यों नहीं सुनाई देती? राम मंदिर के नाम पर आस्था जुटाने वाली भाजपा दीपावली और छठ से पहले जनता को महंगाई का उपहार क्यों दे रही है?
भाजपा की राजनीति का सच अब जनता समझ चुकी है—धर्म के नाम पर वोट, सत्ता के नाम पर अहंकार और महंगाई के नाम पर जनता की जेब पर वार!
राकेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा को यह समझ लेना चाहिए कि जनता की आस्था का राजनीतिक इस्तेमाल करके हमेशा सत्ता में नहीं रहा जा सकता। भगवान राम मर्यादा, न्याय और जनकल्याण के प्रतीक हैं, लेकिन भाजपा की राजनीति में उनके नाम का इस्तेमाल सत्ता के लिए किया जा रहा है। छठी मैया की आराधना करने वाले गरीब परिवारों को महंगाई से राहत देने के बजाय उनके त्योहारों से पहले आर्थिक बोझ बढ़ाना भाजपा की संवेदनहीनता का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि जनता को धार्मिक नारों और चुनावी दिखावे की नहीं, बल्कि महंगाई से राहत, रोजगार और सम्मानजनक जीवन की जरूरत है। भाजपा को मंदिरों और रैलियों की राजनीति छोड़कर जनता की रसोई, रोजगार और रोजमर्रा की समस्याओं पर जवाब देना चाहिए।
दीपावली पर दीप जलेंगे, छठी मैया की आराधना होगी, लेकिन भाजपा की महंगाई और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जनता का आक्रोश भी लगातार बढ़ेगा। आने वाले समय में यही आक्रोश भाजपा के राजनीतिक अहंकार का जवाब बनेगा।



