क्यों समुद्र में समा गई श्री कृष्ण की नगरी द्वारका?

द्वारका धाम गुजरात के काठियावाड क्षेत्र में अरब सागर के समीप स्थित है।
मथुरा से जाने के बाद श्री कृष्ण ने इस विशाल नगर की स्थापना की थीं। लेकिन श्रीकृष्ण की मृत्यु के बाद यह खूबसूरत नगरी समुद्र में डूब गयी । रिसर्च के मुताबिक खुदाई में मिली द्वारिका नगरी 9000 साल पुरानी है। आज भी समुद्र की गहराई में इसके अवशेष मौजूद है। श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी के जल विलीन होने की कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। चलिए जानते हैं भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी के डूबने के पीछे क्या वजह थी?
श्री कृष्ण को गांधारी का शाप
पौराणिक कथा के अनुसार, जरासंध द्वारा प्रजा पर होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए भगवान श्री कृष्ण मथुरा को छोड़कर चले गए थे। श्रीकृष्ण ने समुद्र किनारे अपनी एक दिव्य नगरी बसायी। इस नगरी का नाम द्वारका रखा। माना जाता है कि महाभारत के 36 वर्ष बाद द्वारका नगरी समुद्र में समा गई थी। महाभारत में पांडवों की विजय हुई और सभी कौरवों का नाश हो गया था।
इसके बाद जब युधिष्ठिर का हस्तिनापुर में राजतिलक हो रहा था, उस समय श्रीकृष्ण भी वहां मौजूद थे। तब गांधारी ने श्रीकृष्ण को महाभारत युद्ध का दोषी ठहराते हुए भगवान श्रीकृष्ण को शाप दिया कि अगर मैंने अपने आराध्य की सच्चे मन से आराधना की है और मैंने अपना पत्नीव्रता धर्म निभाया है तो जो जिस तरह मेरे कुल का नाश हुआ है, उसी तरह तुम्हारे कुल का नाश भी तुम्हारी आंखों के समक्ष होगा। कहते हैं की इस शाप की वजह से श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी पानी में समा गई।
कृष्ण पुत्र सांब को ऋषियों का शाप
एक अन्य कथा के अनुसार, कृष्ण के पुत्र सांब को मिले शाप से द्वारिका नगरी का अंत माना जाता है। ऋषि वाल्मिकी, नारद मुनि और अन्य ऋषि द्वारका का भ्रमण करने आए थे, तब सांब उनका उपहास करने के लिए गर्भवती स्त्री का रुप धारण करके उनके पास गया। इसका पता ऋषियों को लगा और उन्होनें सांब को शाप दिया कि उसकी कोख से मूसल उत्पन्न होगा जिसके कारण पूरे यदुवंश का नाश होगा।
राजा उग्रसेन को इस बात का पता चलते ही उन्होनें मूसल को समुद्र में फेंकवा दिया। एक युद्ध के दौरान कृष्ण पुत्र प्रद्युमन के मित्र सात्यकि ने वृष्णि वंशी कृतवर्मा का वध कर दिया, जिसे वृष्णि वंशी सहन नहीं कर पाए और उन्होंने सात्यिक सहित कृष्ण के पुत्र प्रद्युमन का भी वध कर दिया।
जब पांडवों को द्वारका में हुई अनहोनी का पता चला तो अर्जुन तुरंत द्वारका गए और श्रीकृष्ण के बचे हुए परिजनों को अपने साथ इंद्रप्रस्थ लेकर चले गए। इसके बाद देखते ही देखते पूरी द्वारका नगरी रहस्यमयी तरीके से समुद्र में समा गई।

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