माननीयों के सर पर तेल रहते हुए और कितने तेल डालेंगे मुख्यमंत्री जी: दिलीप मिश्रा
खूंटी: झारखंड विकास मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष दिलीप मिश्रा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि झारखंड जैसे गरीब और पिछड़ा राज्य में सरकार के द्वारा माननीय का वेतन,भत्ता सहित अन्य चीजों में वृद्धि करना यह यहां के जनता के साथ अन्याय करना है।
माननीयों का वेतन वृद्धि चाहे मुख्यमंत्री मंत्री मुख्य सचेतक या विधायक सभी का वेतन एवं भत्ता में करीब 20000 की बढ़ोतरी की गई है।राज्य अलग होने के बाद का वेतन एवं भत्ता करीब 17 बार वृद्धि किया गया है जो किसी भी स्तर पर वैध नहीं कहा जा सकता है।
मुख्यमंत्री, मंत्री एवं विधायक के वेतन एवं भत्ता तथा प्रभारी भत्ता राज्य के अंदर या बाहर प्रतिदिन तीन से चार हजार कर दिया गया है।
विधायकों को आवास हेतु ऋण 40 लाख से 80 लाख कर दिया गया है। 4% ब्याज क्षेत्रीय भत्ता सरकार भत्ता पूर्व के विधायक को भी पेंशन करीब 2 लाख एवं 15000 पर एक अनुसेवक बहाल करने का निर्णय किया गया है। माननीय को आवास ऋण 40 लाख से 80 लाख 4% ब्याज पर दिया गया है।
माननीय मुख्यमंत्री, विधायकों के सर पर तेल रहते हुए और कितने तेल डालेंगे। देश में झारखंड के माननीय को वेतन एवं भत्ता जो पांचवें स्थान पर है। माननीय मुख्यमंत्री जी जब वेतन एवं भत्ता तथा विधायकों को लाभ देने की बारी सभी विधायक एक हो जाते हैं। ध्वनि मत से पास किया जाता है वेतन भत्ता डील।
माननीय मुख्यमंत्री जी झारखंड में माननीय विधायकों के साथ साथ 3 करोड़ जनता भी है, उसकी भी बुनियादी समस्याओं को त्वरित गति से समाधान करने की आवश्यकता है।
आपकी सरकार ने सरकार बनने के बाद झारखंड के युवकों को ₹4000 की दर से बेरोजगारी भत्ता देने की बात किया था। क्या हुआ पलायन रोकने हेतु नियोजन देने का वादा किए थे, होमगार्ड जवानों को फोर्थ ग्रेड के पेपर स्थाई नौकरी आंगनबाड़ी सेविकाओं को बकाया मानदेय का भुगतान रसोइयों संघ को दिसंबर 2023 से अभी तक मानदेय की बकाया।
सहायक पुलिसकर्मी जिसकी उम्र खत्म हो गई है। उसकी स्थायीकरण पर जल सहिया आदि तथा पर l शिक्षकों के स्थायीकरण पर पूर्व में सरकार के निर्णय को अमल करने किसानों के ऋण माफी योजना को अक्षर वश लागू करने तथा दिए आश्वासन को पूरा करते तो बड़ी बात होती पर इन बिंदुओं पर सरकार का ध्यान नहीं गया। पानी बिजली चिकित्सा महंगाई एवं अंचल से सचिवालय तक भ्रष्टाचार में लिप्त है, इस और सरकार को पहल करनी चाहिए था ना कि विधायकों के वेतन भत्ता में वृद्धि करने की।

