शिबू सोरेन के निधन पर प्रदेश भाजपा,झामुमो,आजसू और राजद के नेताओं ने क्या कहा..
रांची : पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन पर झारखंड के कई राजनीतिक पार्टी ने नम आँखों से श्रद्धांजलि दी। झारखंड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय महासचिव बिनोद पाण्डेय ने कहा कि झारखंड की आत्मा आज शोकाकुल है। दिशोम गुरु, हमारे पिता तुल्य पथप्रदर्शक, आदिवासी चेतना के प्रतीक आदरणीय शिबू सोरेन जी का निधन एक युग के अंत जैसा है। उन्होंने न केवल झामुमो की नींव रखी, बल्कि एक समतामूलक और स्वाभिमानी झारखंड की कल्पना को साकार किया।आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तो यह केवल एक नेता का जाना नहीं, बल्कि हमारे संघर्ष की जीवित आत्मा का पृथ्वी से विलीन हो जाना है। वे हमारे लिए संगठनकर्ता, विचार पुरुष, मार्गदर्शक और अपनेपन का दूसरा नाम थे।
झामुमो के केन्द्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि आदरणीय गुरु जी ने अपने जीवन कल में धारा के विपरीत जा कर संघर्ष किया और कभी भी पराजित नहीं हुए। गुरूजी के संघर्षपूर्ण जीवन को आत्मसात करते हुए देश के दबे कुचले समाज ने अपनी पहचान सम्मान तथा अधिकार प्राप्त किया।गुरूजी ने हमेशा अज्ञानता क विरूद्ध पढ़ाई, शोषण के विरुद्ध लड़ाई तथा सम्मान पूर्ण जीवन यापन के लिए संघर्ष करने का राह दिखाया। गुरूजी शारीरिक तौर पर पार्टी के साथ अब नहीं रहे लेकिन उनकी शिक्षा पार्टी के हर सदस्य को जीवन के कठिन परिस्थितियों में भी पराजय को स्वीकार ना करने के प्रण के साथ एक आधार की तरह कठोर स्तम्भ बन कर कायम रहेगा।
वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरंडी ने कहा कि शिबू सोरेन से दिशुम गुरु बनने की यात्रा पर कहा कि यह यात्रा कठिन संघर्ष और आंदोलन की यात्रा है। पिता की हत्या के बाद राज्य में व्याप्त महाजनी प्रथा के खिलाफ एक संघर्षशील जुझारू शिबू सोरेन का उदय हुआ। जिन्होंने शराब बंदी केलिए भी गांव में संघर्ष करते हुए अभियान चलाए। श्री मरांडी ने कहा कि सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ लड़ते हुए स्व शिबू सोरेन अलग राज्य के आंदोलनों से जुड़कर आंदोलन को दिशा दी,संघर्ष किया,जिसमें जनता ने उनका साथ दिया। आज अलग झारखंड राज्य की स्थापना में स्व शिबू सोरेन के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
राजद के प्रदेश प्रवक्ता कैलाश यादव ने कहा कि गुरुजी शिबू सोरेन आदिवासी के सबसे बड़े नेता थे। उन्होंने गरीब, दलित, पिछड़े वंचित समाज के अधिकार और रक्षा के लिए संपूर्ण जीवन संघर्ष करते रहे। जल, जंगल जमीन, खनिज, संपदा की रक्षा के लिए सदैव लड़ते रहे। शिबू सोरेन न्याय प्रिय जननेता थे। राज्य निर्माण के दौरान झारखंड शब्द नाम देने वाले जननायक क्रांतिकारी नेता शिबू सोरेन थे।
आजसू पार्टी के प्रमुख सुदेश महतो ने कहा है कि एक युग का अवसान हो गया। जयपाल सिंह के बाद बिखर चुके झारखंड आंदोलन को गुरुजी ने एकजुट किया और नई दिशा दी। उन्होंने आदिवासी समाज के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई को जिस संकल्प और संघर्ष के साथ लड़ा, हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
श्री महतो ने कहा कि मैंने व्यक्तिगत रूप से गुरुजी को नज़दीक से देखा और जाना है। उनसे संवाद करना और आंदोलन के प्रत्येक मोड़ पर उनके अनुभवों से सीखना मेरे राजनीतिक जीवन की अमूल्य धरोहर है। उनका जाना झारखंड के एक युग का अंत है।
रांची महानगर कांग्रेस के प्रवक्ता अजय कुमार सिंह ने कहा कि झारखंड के दिशोम गुरू, क्रांतिकारी एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन से देश एवं झारखण्ड राज्य को अपूर्ण क्षति हुई है। दिशोम बुरू शिबू सोरेन,झारखण्ड अलग राज्य के प्रणेता आंदोलन को आगाज से अंजाम तक पहुुचाने वाले एवं झारखण्ड वासियों के लिए चिंतित रहने वाले वंचित समाज के अधिकारों के लिए अपना जीवन काल में सतत संघर्षील रहें उन्हें के संघर्ष से झारखण्ड अलग राज्य मिला।



