हमें रांची विश्वविद्यालय की गौरवशाली परंपरा को आगे ले जाना है :कुलपति
रांची: रांची विश्वविद्यालय का 67 वें त्रिवदिसीय स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ आर्यभट्ट सभागार में हुआ। कुलपति रांची विश्वविद्यालय प्रो. सरोज शर्मा तथा सभी वरीय पदाधिकारियों के द्वारा द्वीप प्रज्जवलन और पीएफए विभाग के छात्रों के राष्ट्रगीत और कुलगीत की प्रस्तुति से कार्यक्रम ‘प्रारम्भ’ शुरु हुआ।
सभी अतिथियों एवं पदाधिकारियों को पुष्पगुच्छ आ स्मृतिचिन्ह और शौल ओढ़ा कर स्वागत किया गया। इस अवसर पर माननीय कुलपति रांची विश्वविद्यालय प्रो. सरोज शर्मा ने झारखंड की भूमि को नमन करते हुये सबों को 67वे स्थापना दिवस शुभकामनायें दीं और कहा कि 1960 में झारखंड क्षेत्र में स्थापित रांची विश्वविद्यालय की यात्रा बहुत ही गौरवशाली रही है और इसकी परंपरा शिक्षण के क्षेत्र में योगदान अप्रतिम रहा है।यहां विद्वान शिक्षकों की एक परंपरा रही है जिन्होंने विद्यार्थियों और युवाओं को सदैव निखारने का कार्य किया है। रांची विश्वविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्रों की इतनी समृद्ध सूची है कि हम क्यों नहीं भव्यता से अपना स्थापना दिवस मनायें। हमने एन एस एस , खेल और अकादमिक क्षेत्रों में बहुत अच्छा किया है।हमने भारतीय ज्ञान परंपरा को आरयू में लागू किया है। यह गर्व की बात है कि एनइपी 2020 के अनुसार रांची विवि का पहले बैच के हमारे विद्यार्थी जल्द ही उत्तीर्ण होकर कर निकलेंगे। उन्होंने कहा कि मुझे अब पूरी उम्मीद है कि नवगठित विवि आयोग आरयू की हर प्रकार के आवश्यकताओं को पूरा करेगा। ये त्रिदिवसीय समारोह निश्चित रूप से मील का पत्थर साबित होगा अब हमारा ये दायित्व है कि इस गौरवशाली परंपरा को आगे ले जायें।रांची युनिवर्सिटी में आज 1600000 विद्यार्थी यहां एनरोल हैं ।यहां हमें इक्वेलिटी के साथ क्वालिटी एजुकेशन देना है।
कार्यक्रम में पीएफए विभाग के विपुल नायक की टीम द्वारा रांची विश्वविद्यालय के 1960से 2025 तक की यात्रा को कोरियोग्राफी ‘मैं हूं रांची विश्वविद्यालय’ के माध्यम से भव्य प्रस्तुति दी गयी। जिसे देखकर सभागार के सभी दर्शक अभिभूत हो गये और सभागार तालियों से गूंज उठा।
टीआर एल के नागपुरी विभाग के छात्र छात्राओं ने करसा नृत्य की मोहक प्रस्तुति दी।
आरयू के कुछ विभागों की तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रही है: श्री नरेन्द्र भगत
1960से ही आरयू से जुड़े विशिष्ट अतिथि श्री नरेन्द्र भगत (सेवानिवृत आइएस तथा रांची विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार) ने स्थापना दिवस पर अपनी यादों को साझा किया। उन्होंने सबों को शुभकामनाये देते हुते कहा कि यह 67वां स्थापना दिवस मुझे अतीत की यादों में ले जाता है।मैं विवि की यात्रा का साक्षी भी रहा और सहयात्री भी। रांची विवि ने कइ इंस्टिट्यूशन को पुष्पित पल्लवित किया जिसमें रिम्स बीएयू जैसे संस्थान थे।1960 में मैंने यहां पढ़ाई की और 1966 में मैंने पीजी बॉटनी में अध्यापन किया। तब आरयू के विभागों और प्राध्यापकों की ख्याति अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर थी। तब शिक्षक बहुत ही सादगी से रहते थे। एथ्रोपोलोजी, साइकोलोजी की भी बहुत ख्याति थी। तब कभी भी सेशन या परीक्षा देरी नहीं होते थे।कल्चरल और स्पोर्टिंग एक्टिविटी बहुत होते थे। मैंने रांची विवि से अपने लगाव के कारण छपरा की कलेक्ट्री छोड़ आरयू में रजिस्ट्रार का पद ग्रहण किया।
इस आयोजन में पूर्व कुलपति प्रो.ए ए खान, प्रो. कामिनी कुमार, प्रो.अजीत कुमार सिन्हा उपस्थित रहे।
रांची विश्वविद्यालय के डीएसडबल्यू डॉ. सुदेश कुमार साहु ने रांची विश्वविद्याल की विशिष्टता और उपलब्धियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि रांची विश्वविद्यालय पठन पाठन के अलावा खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी अग्रणी है। अभी हमने इस्ट जोन फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन किया था जिसमें हम विजेता रहे।
इस अवसर पर फुटबॉल टीम के सभी खिलाड़ियों को मंच पर कुलपति ने सम्मानित किया।
राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित आरयू के तीन छात्रों दिवाकर आनंद, फलक फातिमा और दीक्षा कुमारी को भी मंच पर कुलपति ने सम्मानित किया ।पहले दिन के कार्यक्रम ‘आरम्भ’ का संचालन सीवीएस की डिप्टि डायरेक्टर डॉ. स्मृति सिंह और डॉ.किशोर सुरीन ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन रजिस्ट्रार रांची विवि डॉ. राजकुमार शर्मा ने किया उन्होंने सबों का आभार व्यक्त किया और कहा कि हम सभी रांची विश्वविद्यालय की पुरानी गौरवशाली परंपरा को बनाये रखने को कृतसंकल्प हैं।
राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर डीएसडब्ल्यू ,सीसीडीसी, परीक्षा नियंत्रक, रजिस्ट्रार, प्रोक्टर, सभी संकायाध्यक्ष ,विभिन्न विभागों के हेड प्राध्यापक व अन्य उपस्थित थे।
कार्यक्रम के दूसरे दिन 11 जुलाई को कला दिवस के रूप में मनाया जायेगा वहीं 12 जुलाई को हरित विथीका का आयोजन होगा। यह दोनों आयोजन शहीद चौक स्थित मुख्य प्रशासनिक भवन में होंगे। जिसमें परिसर की दीवारों पर सोहराई पेंटिंग से लेकर पौधारोपण के कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।


