झारखंड में इसबार कमल खिलेगा या तीर धनुष,हाथ और लालटेन का कब्जा बरकरार रहेगा !
रांची: झारखंड में विधानसभा चुनाव नियत समय से पहले होने की संभावना है। यानी अक्टूबर- नवंबर में विधानसभा चुनाव हो सकता है। इसके लिए राजनीतिक दलों के साथ साथ चुनाव आयोग भी रेस में है। इसमें बीजेपी एक कदम आगे चल रही है।

बीजेपी ने पैरासूट से तीन तीन दिग्गज नेताओं को झारखंड में उतार दिया है। इनमे एक असम के सीएम हिमांता विश्व सरमा दूसरे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और तीसरे नंबर पर झारखंड बीजेपी प्रभारी लक्ष्मीकांत बाजपेई हैं। इसके अलावा ऊपर से देश के गृह मंत्री और राजनीति में चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह भी शनिवार बीस जुलाई को रांची के प्रभात तारा मैदान में बीजेपी विस्तृत कार्यसमिति की बैठक में कार्यकर्ताओं को जीत के मंत्र दे चुके हैं। बीजेपी कार्यकर्ताओं को 24की जंग के लिए तैयार कर चुके हैं। यानी बीजेपी इस बार झारखंड में कमल खिलाने के लिए पूरे जोर शोर से लगी हुई है। बीजेपी के शीर्ष नेताओं के साथ साथ बूथ स्तर के कार्यकर्ता गांव गांव कूच कर चुके हैं और हेमंत सोरेन सरकार की नाकामियों को उजागर करना शुरू कर चुके हैं। ये लोग लोकसभा चुनाव में 55 विधानसभा सीटों पर मिली लीड को बेस बनाकर आगे की रणनीति अख्तियार कर रहे हैं। बीजेपी के नेताओं को यह विश्वास है कि लोकसभा चुनाव परिणाम से अच्छा विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिलेगा। विधानसभा चुनाव में कम से कम पार्टी 55सीटों पर जीत जरूर हासिल करेगी। वहीं झामुमो,कांग्रेस,राजद और माले यानी इंडिया गठबंधन के नेता किसी भी कीमत पर एनडीए को चुनाव परिणाम में ढाई अंक छूने नहीं देना चाहते हैं। इसके लिए इंडिया गठबंधन के नेताओं का भी अंदर ही अंदर खेला चल रहा है।
कथित जमीन घोटाला के आरोप में हाल ही में बेल पर बाहर आए सीएम हेमंत सोरेन विधानसभा चुनाव के लिए इंडिया गठबंधन की कमान संभाल चुके हैं। इस बार तो उनकी पत्नी झामुमो विधायक कल्पना सोरेन भी स्टार प्रचारक की भूमिका में होंगी। लोकसभा चुनाव में कल्पना सोरेन इंडिया गठबंधन में स्टार प्रचारक थीं और जेएमएम को दो सीट से पांच पर पहुंचा दिया।
वहीं राजनीतिक जानकारों की मानें तो जेएमएम को 28 सुरक्षित सीटों में 25 पर इस बार सफलता हाथ लग सकती है। आदिवासियों में हेमंत सोरेन का क्रेज बरकरार है। उसके सहयोगी दल कांग्रेस की सीटें कम हो जायेगी। कांग्रेस को पांच सीटें ही मिल सकती है। इस बार लेफ्ट और अन्य यानी निर्दलीय विधायकों की संख्या बढ़ेगी। राजद की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है।
इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जेएमएम ही रोक सकता है। अनरिजर्व सीटों पर इस बार जेएमएम की सीटें बढ़ सकती है।
विधानसभा चुनाव परिणाम में निर्दलीय विधायकों की भूमिका अहम हो जायेगी।
सरकार बनाने के लिए निर्दलीय विधायकों का सहयोग लेना पड़ सकता है।

