नेमरा के लोगों को गुरु जी के स्वस्थ्य होकर लौटने की थी उम्मीद….  

रांची : झारखंड में आदिवासियों के महानायक शिबू सोरेन के निधन से झारखंड ही नहीं पूरा देश शोक में डूबा हुआ है। वहीं गुरु जी का पैतृक गांव रामगढ़ जिले के नेमरा में मातम पसरा हुआ है। वहां के लोगों को गुरुजी के लौटने की उम्मीद थी। लेकिन सूचना कुछ और ही मिल गया।

गांव के लोग अब शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर का अंतिम दर्शन के लिए इंतजार में हैं।  

नेमरा के लोग ज्यादातर खेती-बाड़ी करते हैं। शिबू सोरेन के छोटे भाई स्व शंकर सोरेन की पत्नी दीपमणी सोरेन और उनकी बेटी रेखा सोरेन ने बताया कि गुरु जी पैदल बहुत चलते थे। झारखंड घूमने व आंदोलन के लिए इसी पहाड़ की तराई से निकले थे। पहाड़ के चारों ओर रास्ता था।  इसी साकरे रास्ते से शिबू सोरेन ने आंदोलन की शुरुआत का रास्ता तय किया था।

वहीं रेखा सोरेन कहती हैं-बाबा पिछली बार और सोहराय पर्व में घर आये थे। जब से होश संभाली हूं, तब से बाबा हमेशा सोहराय बाबा पर्व में घर आते रहे हैं। नेमरा गांव का एक एक व्यक्ति दुखी है। क्योंकि शिबू सोरेन यहां पर पहले बराबर आते थे। बीच में बीमार होने के बाद कम आने लगे। लेकिन उनकी यादें इस गांव के लोगों को हमेशा साता रही है। शिबू सोरेन ग्रामीणों के बीच रहते थे,उनमें कोई वीआईपी जैसी कोई फिलिंग नहीं था।

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