शिक्षा मंत्री का कार्यभार अब सीएम हेमंत सोरेन के जिम्मे, मंत्रिमंडल एवं निगरानी विभाग ने जारी किया आदेश
रांची: झारखंड में शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन संभालेंगे। मंत्रिमंडल एवं निगरानी विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है। हाल ही में शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन के बाद यह पद खाली हो गया था। ऐसे में जब तक किसी नए विधायक को शिक्षा मंत्री के रूप में जिम्मेदारी नहीं दी जाती, तब तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं इस विभाग का कार्यभार देखेंगे।
शिक्षा मंत्रालय का दुर्भाग्यपूर्ण संयोग
झारखंड की राजनीति में शिक्षा मंत्रालय को लेकर एक विचित्र संयोग सामने आता रहा है। वर्तमान सरकार में यह लगातार देखा गया है कि जो भी नेता शिक्षा मंत्री बनते हैं, उन्हें गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ता है और उनका निधन हो जाता है।
हेमंत सोरेन सरकार (पार्ट-1) में जगन्नाथ महतो शिक्षा मंत्री बने थे। कार्यकाल के दौरान उन्हें फेफड़े में गंभीर संक्रमण हुआ। इलाज के लिए उन्हें बेंगलुरु भेजा गया, जहाँ राज्य सरकार के खर्च पर फेफड़ा ट्रांसप्लांट कराया गया। लेकिन ऑपरेशन के बाद भी वे लंबे समय तक जीवित नहीं रह सके और उनका निधन हो गया।
हेमंत सोरेन सरकार (पार्ट-2) में घाटशिला से झामुमो विधायक रामदास सोरेन को शिक्षा मंत्री बनाया गया। कुछ ही समय बाद वे बाथरूम में गिर पड़े और सिर में गंभीर चोट आई। इलाज के लिए उन्हें दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ हाल ही में उनका निधन हो गया।
इन घटनाओं के कारण यह विभाग कई बार “मनहूस मंत्रालय” के रूप में चर्चा में रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जाने लगा है कि शिक्षा मंत्री की जिम्मेवारी लेना कोई आसान बात नहीं है।
बीच में बने थे बैद्यनाथ राम
हालांकि, इसके अपवाद के रूप में हेमंत सोरेन सरकार पार्ट-1 के अंतिम वर्ष में करीब चार महीने तक लातेहार से झामुमो विधायक बैद्यनाथ राम को शिक्षा मंत्री बनाया गया था। लेकिन 2019 विधानसभा चुनाव में वे भाजपा प्रत्याशी से हार गए और मंत्री पद से बाहर हो गए।
अब सीधे सीएम के हाथों में शिक्षा विभाग
शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन के बाद यह पद रिक्त होने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद इस मंत्रालय का कार्यभार लेने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि इस विभाग की जिम्मेदारी कोई भी विधायक तत्काल लेना नहीं चाहता था, लिहाजा फिलहाल इसे मुख्यमंत्री ने अपने पास रखा है।
भविष्य को लेकर सवाल
राज्य के शिक्षा तंत्र की स्थिति पहले से ही कई सवालों के घेरे में है। स्कूलों की बदहाल स्थिति, शिक्षकों की कमी, कस्तूरबा विद्यालयों में आए दिन भोजन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ, परीक्षाओं की गड़बड़ी—इन तमाम चुनौतियों से निपटने के लिए अब मुख्यमंत्री को खुद सीधे दखल देना होगा।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सीएम का ध्यान इस मंत्रालय पर कितना केंद्रित हो पाता है, यह देखना दिलचस्प होगा।



