मेला का हजार रंग, बोलो क्या क्या खरीदोगे
रांचीः राजधानी रांची के जगन्नाथपुर में रथ मेला पूरे शबाब पर है। यूं कहें कि मेला के हजार रंग हैं, बोलो क्या -क्या खरीदोगे। शुक्रवार से मेला शुरू हो गया है। काफी संख्य़ा में भक्तजन पहुंच रहे हैं। कोविड के कारण पिछले दो साल से मेला नहीं लग पाया था। इस मेला में घर गृहस्थी के समानों से लेकर खाने-पीने व मनोजरंजन की सुविधा उपलब्ध है। न्यूनतम 10 रुपए से लेकर 20 हजार रुपए तक के सामान उपलब्ध है। यहां आए लोगों को पारंपरिक चीजें अपनी ओर खींच रही हैं। परापंरिक सामान आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मनोरंजन के लिए बड़े झूले , ड्रेगन झूला, मौता का कुआं, सांप घर, जादू कई चीजें हैं। युवाओं और बच्चों के बीच यह आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पारंपरिक हथियारों का एक विशेष बाजार जगन्नाथपुर पहाड़ी पर लगा है. इस बाजार में तीर घनूष, भाला, बरछा, तलवार, दाबी, पचखा आदि पारंपरिक हथियारों की दुकान है. घर में इस्तेमाल होने वाले हर वह सामान मेले में उपलब्ध है. मांदर, ढोल और नगाड़ा की भी खरीदारी हो रही है। वाद्ययंत्र बेचने के लिए झारखंड के साथ साथ छत्तीसगढ से भी दुकानदार आए है. मछली पकड़े वाला जाल और कुमनी भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. सुबह से ही मेले में लगी दुकानों पर ग्राहक जुटने लगे थे. बताते चलें कि हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया के दिन भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र के साथ मौसी के घर जाएंगे. जिसे मौसीबाड़ी के नाम से जाना जाता है. भगवान मौसी के घर जाने से पहले दोपहर में मालपुआ एवं विशेष भोग ग्रहण करेंगे. यह विशेष भोग रथ यात्रा के दिन ही तैयार होता है. इस भोग को ग्रहण करने के बाद भगवान रथ पर सवार होंगे. एक जुलाई को सुबह पांच बजे से ही भगवान के दर्शन शुरू हो गए थे. सैकड़ों की संख्या में भक्त सुबह से ही भगवान के दर्शन के लिए कतार में खड़े हो गए थे.

