श्रावणी मेला: सिर्फ आस्था नहीं, अब ‘स्मार्ट यात्रा’ का भी बन गया है प्रतीक, सुविधा पाकर बम-बम बोल रहे कांवरिया
प्रदीप विद्रोही,भागलपुर। इस बार का विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला केवल बाबा भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था का संगम नहीं, बल्कि आधुनिक सुविधाओं और सुव्यवस्थित प्रबंधन का भी नया उदाहरण बनकर उभरा है। सुलतानगंज से देवघर तक करीब 105 किलोमीटर की कांवर यात्रा में पहली बार ऐसी व्यवस्थाएं दिख रही हैं, जिन्होंने लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा को पहले से अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और आरामदायक बना दिया है। फिलवक्त, सुविधा पाकर बम-बम बोल रहे हैं कांवरिया।
नमामि गंगे घाट पर शुरू की गई निःशुल्क लॉकर सुविधा कांवरियों के लिए सबसे बड़ी राहत साबित हो रही है। अब श्रद्धालु मोबाइल, नकदी और अन्य कीमती सामान सुरक्षित रखकर निश्चिंत होकर गंगा स्नान कर रहे हैं। इससे चोरी और सामान गुम होने की घटनाओं की आशंका काफी कम हो गई है।
गंगा घाटों पर सुरक्षा के लिए जालीदार बैरिकेडिंग, एसडीआरएफ की तैनाती, प्रशिक्षित गोताखोर, मोटरबोट और नावों से चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है। वहीं, मेला क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस बल, महिला पुलिसकर्मी और सादे लिबास में जवान लगातार गश्त कर रहे हैं।
इस बार श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था भी पहले से कहीं अधिक बेहतर है। नमामि गंगे घाट पर चार हजार क्षमता वाला आधुनिक जर्मन हैंगर, धांधी बेलारी में 2850 बेड की टेंट सिटी और लगभग चार हजार लोगों की क्षमता वाला एक अन्य टेंट सिटी तैयार किया गया है। इससे दूर-दराज से आने वाले कांवरियों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारने की मजबूरी काफी हद तक समाप्त हो गई है।
कांवर पथ को भी श्रद्धालुओं के अनुकूल बनाया गया है। सड़क के दोनों किनारों पर सफेद पेंट, पैदल मार्ग पर महीन बालू और नियमित पानी का छिड़काव यात्रा को अपेक्षाकृत आरामदायक बना रहा है। जगह-जगह वाटर कूलर, वाटर एटीएम और जल टैंकरों से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
श्रावणी मेले का धार्मिक वातावरण भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। पूरे मेला क्षेत्र में शिव भजनों की मधुर धुनें, फूलों से सजे मार्ग और ‘बोल बम’ के जयकारे यात्रा को भक्तिमय बना रहे हैं।
सफाई व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। तीन पालियों में सफाईकर्मियों की तैनाती के कारण घाट, धर्मशालाएं, यात्री शेड, शौचालय और स्नानागार लगातार साफ-सुथरे रखे जा रहे हैं।
श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए दुकानदारों का पंजीकरण कराया गया है और उन्हें सड़क से निर्धारित दूरी पर दुकान लगाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सूचना केंद्रों और होर्डिंग्स के माध्यम से आवश्यक वस्तुओं की दरें, संपर्क नंबर और जनहित की जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है।
यात्रा को आसान बनाने के लिए रेलवे ने 42 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया है, जबकि बिहार के विभिन्न जिलों से 200 से अधिक विशेष बसें भी चलाई जा रही हैं। इससे बड़ी संख्या में श्रद्धालु आसानी से सुलतानगंज और देवघर पहुंच रहे हैं।
कुल मिलाकर, इस बार का श्रावणी मेला पारंपरिक आस्था के साथ आधुनिक प्रबंधन का सफल संगम बनकर सामने आया है। बेहतर सुरक्षा, स्वच्छता, आवागमन, ठहराव और सुविधाओं ने कांवरियों के अनुभव को नई पहचान दी है, जिसके चलते हर ओर एक ही स्वर गूंज रहा है – बोल बम… हर-हर महादेव और बम – बम बोल रहे हैं कांवरिया।


