सदानंद सिंह की विरासत को सलाम: 25 सितंबर को धुआवे पहुंचेंगे सीएम नीतीश, करेंगे प्रतिमा का अनावरण
प्रदीप विद्रोही,भागलपुर : जिले के कहलगांव विधानसभा क्षेत्र के राजनीतिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज नाम – सदानंद सिंह। कांग्रेस के कद्दावर नेता और नौ बार विधायक रहे स्व सिंह की स्मृति में उनके पैतृक गांव अरार धुआवै में स्थापित की जा रही प्रतिमा के अनावरण के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 25 सितंबर को विशेष दौरे पर पहुंचेंगे। उनके साथ सूबे के कई मंत्री भी साथ रहेंगे. स्थानीय लोग कहते हैं केवल एक प्रतिमा का अनावरण नहीं, बल्कि उस जननेता को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने दशकों तक कहलगांव की आवाज़ विधानसभा में बुलंद की।
गांव में तैयारियों का जोर है और आयोजन स्थल पर गतिविधियां चरम पर हैं। अनावरण स्थल, जो मां चण्डिका स्थान के ठीक सामने स्थित है, जो 1962 ई को श्री सिंह के पूर्वजों यानी दादा मिश्रीलाल व पिता कृष्णाप्रसाद द्वारा स्थापित चण्डिका मिश्रीलाल कृष्णप्रसाद उच्चतर माध्यमिक (+2) प्लस टू विद्यालय अरार – धुआवै के मुख्य गेट से सटा हुआ है लगभग तैयार हो चुका है। सभा स्थल, महादेव स्थान परिसर में बनाया जा रहा है, जहां सीएम नीतीश आमजनों को संबोधित करेंगे। सभा स्थल पर जर्मन हैंगर पंडाल का निर्माण जारी है, जो इस आयोजन को भव्यता देगा। वहीं, मुख्यमंत्री के आगमन के लिए हेलीपेड पास के बियाडा की जमीन पर तैयार किया जा रहा है।
पिता के निधन के बाद पुत्र ई शुभानंद मुकेश जेडीयू का दामन थाम लिया। स्व सिंह के पुत्र जेडीयू नेता ई शुभानंद मुकेश कहते हैं कि पिताजी के अधूरे सपनों को हम और उनके चाहने वालों के साथ मिलकर एक नया आयाम देंगे।
डीएम, एसएसपी समेत जिला प्रशासन की टीमों ने मौके पर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया है और जरूरी निर्देश दिए हैं। सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक प्लानिंग और आयोजन की बारीकियों पर बारीकी से काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यह यात्रा केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजनीति के एक पुराने योद्धा संग राजनेता को श्रद्धांजलि देने का भावनात्मक क्षण भी है। दो अलग-अलग दलों में रहने के बाद भी सदानंद सिंह और नीतीश कुमार की राजनीतिक साझेदारी और सम्मान वर्षों पुरानी रही है। निधन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिवंगत श्री सिंह के 12 वीं में पहुंचकर उनके परिजनों को सांत्वना देने तथा उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने कहलगांव स्थित आवास पहुंचे थे. कुलमिलाकर, 25 सितंबर को धुआवे गांव एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने जा रहा है – जहां राजनीति, श्रद्धा और स्मृति एक साथ समाहित होंगी।



