संभले नहीं संभल रहीं बिजली कंपनियां, टॉप लेवल के 15 आइएएस संभाल चुके हैं कमान, फिर भी कर्जा 8000 के पार,22 साल बाद भी नो प्रोफिट नो लॉस पर नहीं आ पाई बिजली कंपिनयां
रांचीः झारखंड की बिजली कंपनियां ऐसी है जिसने जब चाहा तब बहती गंगा में हाथ धोया। सीबीआइ, एसीबी के लपेटे में कई अफसर-इंजीनियर भी हैं। लेकिन बिजली कंपिनयों ने अपने उपभोक्ताओं का दर्द नहीं समझा। हाल यह है कि अब पत्ता भी खड़कता है तो बत्ती गुल हो जाती है। राज्य गठन के 22 साल बाद भी इंफ्रास्ट्रक्टर में जितना सुधार होना चाहिए था, वह हो नहीं पाया। खास बात तो यह है कि राज्य गठन के बाद से अब तक टॉप लेवल के 15 आइएएस अफसरों ने बिजली बोर्ड की कमान संभाली, फिर भी बिजली कंपनियों के साथ उपभोक्ताएं को राहत नहीं मिल पाई है। वितरण निगम का कर्जा 8000 करोड़ रुपए के पार हो गया है। राज्य गठन के 22 साल बाद भी बिजली कंपनियां नो प्रोफिट नो लॉस तक नहीं पहुंच पाई हैं। अब फिर से बिजली दर में वृद्धि का प्रस्ताव दिया गया है। इसमें 17 से 18 फीसदी वृदिध् की बात कही जा रही है। अब तक पूर्व मुख्य सचिव शिव बसंत दो बार बिजली बोर्ड के अध्यक्ष रहे। इसके अलावा बीके चौहान, पीपी शर्मा, टी नंदकुमार, डॉ शिवेंदू, एके चुग, एनएन पांडेय, आरके श्रीवास्तव, एसकेजी रहाटे, डॉ नितिन मदन कुलकर्णी ,सुधीर त्रिपाठी, डीके तिवारी,वंदना दादेल एल खिंयाग्यते सीएमडी रहे। वर्तमान में प्रधान सचिव रैंक के अफसर अविनाश कुमार सीएमडी हैं।

