कटाव की मार से सहमे सबौर के लोग, एक रात में गंगा ने निगल ली 10 बीघा जमीन,घरों पर भी खतरा
भागलपुर। जिले के सबौर ब्लॉक में गंगा का कहर एक बार फिर लोगों के सिर पर टूट पड़ा है। फरका पंचायत के इंग्लिश गांव में शुक्रवार रात अचानक गंगा की धारा का रुख बदल गया, और कुछ ही घंटों में करीब 10 बीघा उपजाऊ खेत नदी में समा गए। कटाव इतना तेज था कि मिट्टी के साथ लोगों की उम्मीदें भी गंगा में बह गईं। गांव के किनारे अब 100 मीटर दूर तक दर्जनों घर खतरे की जद में आ चुके हैं। खेत उजड़ चुके हैं, और लोगों की रातें अब जागकर गुजर रही हैं।
स्थानीय किसान बताते हैं कि शाम तक जहां फसलें लहरा रही थीं, रात होते-होते वहां सिर्फ पानी की गहराई बची। “हमने अपनी आंखों के सामने खेतों को बहते देखा,” कहते हैं किसान शिवशंकर यादव, अगर सरकार ने तुरंत कुछ नहीं किया, तो हम सबको घर छोड़ना पड़ेगा। पंचायत समिति सदस्य अजय मंडल ने बताया कि फरका मैदान स्थित स्टेडियम भवन भी अब खतरे की सीमा पर है। सड़क कटाव स्थल से मात्र 100 मीटर दूर रह गई है। अगर कटाव जारी रहा, तो स्टेडियम और आसपास के मोहल्ले भी गंगा में समा जाएंगे, उन्होंने चेताया।
यह वही इलाका है जहां दो साल पहले जल संसाधन विभाग ने 17 करोड़ रुपये खर्च कर 600 मीटर में जियो बैग डाले थे। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि काम की गुणवत्ता कमजोर थी। जिसका नतीजा यह है कि दो साल भी नहीं बीते और पूरा सुरक्षा तंत्र नदी में बह गया। तीन साल पहले भी यही इलाका कटाव का शिकार हुआ था। उस समय एक दर्जन घर, प्राथमिक विद्यालय, बिजली पोल, जलमीनार और सड़क गंगा में समा चुके थे।
इंग्लिश गांव के लोग अब अपने घरों को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। कुछ परिवार अपने सामान समेटकर सुरक्षित स्थान की तलाश में हैं। हर साल यही हाल होता है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा खराब हैं,.गांव की बुजुर्ग सरस्वती देवी बताती हैं।
इस संबंध में सबौर के अंचल अधिकारी (सीओ) सौरभ कुमार ने कहा, “कटाव की सूचना मिली है। जिला प्रशासन को जानकारी दी जा रही है। डीएम के निर्देश पर जल संसाधन विभाग को स्थल निरीक्षण कर तत्काल कटावरोधी कार्य शुरू करने का आदेश दिया जाएगा।”
हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन गंगा का यह कटाव मानो थमता ही नहीं। ग्रामीणों की आंखों में अब सिर्फ एक सवाल है।क्या प्रशासन की योजनाएं इस बार धरातल पर उतरेंगी या फिर गंगा एक बार फिर उनका सब कुछ बहा ले जाएगी?



