मेधा पेड़े का स्वाद अब सात समंदर पार के लोग भी ले सकेंगे: सुधीर कुमार

रांची : झारखंड में मेधा डेयरी लगातार अपनी बुलंदियों के साथ आगे बढ़ रही है। मेधा के नए नए भेराईटी को बाजार में उतार कर ग्राहकों को अपनी ओर खींच रहा है।
मेधा डेयरी की आने वाले दिनों में ग्राहकों के लिए क्या कुछ खास है इसपर कंपनी के निर्देशक सुधीर कुमार ने गणादेश से बातचीत की है.
उन्होंने कहा कि मेधा झारखंड का अपना ब्रांड है। यहां के किसानों द्वारा उत्पादित दूध ही मेधा है। मेधा मुश्किल से पांच से सात साल पुराना है। जबकि अन्य बड़े-बड़े डेयरी काफी पुराना है। फिर भी मेधा ने सबको पीछे कर दिया है। मेधा की गुणवत्ता को यहां के लोगों ने पसंद किया है। यही कारण है की मेधा झारखंड के लोगों का पनपसंद बन गया है। मेधा का मेधा स्पेशल लोगों को काफी पसंद आ रहा है. साथ ही उपभोक्ताओं के अनुरूप ही हमलोग प्राडक्ट तैयार करते हैं
उन्होंने कहा कि झारखण्ड में मेधा डेयरी के चार प्लांट पहले थे और तीन नए प्लांट शुरू होने वाले हैं। वर्तमान में झारखण्ड में दूध उत्पादन क्षमता पचास हजार लीटर है उसे एक लाख करने की योजना है। वहीं साहेबगंज में नए प्लांट पर कहा की यह बनकर तैयार है। यह पूरी तरह से ऑटोमेटिक है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के द्वारा उद्घाटन होगा।
उन्होंने कहा कि साहेबगंज में काफी संख्या में दूध है। मेधा का प्लांट शुरू होने से वहां के किसानों को बाजार मिल जायेगा। पहले वहां पर भागलपुर से दूध आता था.
उन्होंने कहा कि मेधा का पेड़ा अब कड़ी देशों के लोग भी लुत्फ़ उठा सकेंगे. सावन में इसकी पहली खेप बहरीन भेजा जायेगा. बेहरीन के लोगों ने झारखण्ड में निर्मित मेधा के पेड़ा को काफी पसंद किया है. इसलिए हमलोगों ने इसबार से सावन महीने से वहां भेजने का फैसला लिया है.उसकी पैकिंग की तैयारी चल रही है।
श्री कुमार ने कहा कि झारखण्ड में मेधा का दूध बिहार,बंगाल उड़ीसा भेजा जा रहा है. आने वाले समय में अन्य राज्यों को भी हमलोग सप्लाई करेंगे.
हमारा उद्देश है की सभी 24 जिले में मेधा का प्लांट स्थापित हो. साथ ही किसानों को अधिक से अधिक लाभ दिया जा सके. हमलोग मधुमाखी पालन की और भी आगे बढ़ रहे हैं.

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