मोहन कुमार स्टेडियम के स्वर्णिम 50 वर्ष पूरे

बोकारो – इस्पात नगरी बोकारो के हृदय में स्थित मोहन कुमार मंगलम स्टेडियम ने अपनी स्थापना के पाँच दशक पूरे कर एक ऐतिहासिक स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश किया है। 1970 के दशक के मध्य में बोकारो स्टील प्लांट द्वारा निर्मित यह विशाल खेल परिसर, जो लगभग 40,000 दर्शकों की क्षमता रखता है, केवल एक खेल मैदान नहीं, बल्कि बोकारो के तकनीकी और सामाजिक-सांस्कृतिक विकास का जीवंत प्रतीक रहा है। 21 नवंबर 1975 को बी एस एल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक के सी खन्ना ने स्टेडियम का उदघाटन किया था।स्टेडियम की नींव बोकारो स्टील सिटी के विकास के प्रारंभिक वर्षों में रखी गई थी। तत्कालीन केंद्रीय इस्पात और खान मंत्री मोहन कुमार मंगलम के नाम पर समर्पित यह स्टेडियम, शहर को न केवल औद्योगिक नगर बल्कि खेल के क्षेत्र में एक पहचान देने के उद्देश्य से बनाया गया था। इसका निर्माण बीएसएल के कर्मचारियों और उनके बच्चों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने हेतु किया गया था। यह मुख्य रूप से एक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एक विशाल फुटबॉल स्टेडियम है, जिसमें एथलेटिक्स के लिए 400 मीटर का ट्रैक, और तीरंदाजी तथा अन्य मैदानी खेलों के लिए स्थान मौजूद है। परिसर में खिलाड़ियों के लिए ड्रेसिंग रूम, वीआईपी गैलरी, प्रेस बॉक्स और विभिन्न खेल अकादमियों के लिए प्रशिक्षण सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं।
मोहन कुमार स्टेडियम हमेशा से बड़े आयोजनों का केंद्र रहा है। यहाँ बोकारो स्टील फुटबॉल कप टूर्नामेंट का आयोजन होता था, जिसकी विजेता टीम 1978-79 में बोकारो स्टील लिमिटेड की टीम थी। 1980 में, इस स्टेडियम ने एक यादगार मैच की मेजबानी की, जो कॉसमॉस क्लब रूस और सीमा सुरक्षा बल के बीच खेला गया था। यह आयोजन बीएसएल के तत्वावधान में आयोजित किया गया था और बोकारो को अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल मानचित्र पर स्थापित करने में सहायक रहा।
बीते पाँच दशकों में, यह परिसर असंख्य अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभाओं का जन्मस्थान और प्रशिक्षण केंद्र रहा है। दिवंगत ओलंपियन और अर्जुन अवॉर्ड विजेता स्वर्गीय पीटर थंगराज (जो एशिया के शताब्दी, 1900-2000, के सर्वश्रेष्ठ गोलकीपरों में से एक थे) जैसे विश्व विख्यात खिलाड़ियों का नाम इस विरासत से जुड़ा है।
यहां प्रशिक्षित अंतर्राष्ट्रीय वेटलिफ्टर और कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक विजेता प्रतिमा कुमारी (वर्तमान में सीआरपीएफ में सेकंड इन कमांड) तथा अंतर्राष्ट्रीय पावरलिफ्टर और ऐशियन बेंचप्रेस चैंपियनशिप कांस्य पदक विजेता जे. बर्मन ( सेवानिवृत्त) ने बोकारो के गौरव को बढ़ाया है। अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षक राजेन्द्र प्रसाद और आर. बी. साह (सेवानिवृत्त, ) ने भी खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय मार्गदर्शन प्रदान किया है। स्टेडियम ने ऑल इंडिया एथलेटिक्स चैंपियनशिप और ओपन स्टेट चैंपियनशिप की मेजबानी की है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय एथलीट और एशियाई रिकॉर्ड होल्डरों ने हिस्सा लिया है।वर्तमान में, स्टेडियम में हैंडबॉल, एथलेटिक्स, फुटबॉल इत्यादि खेलों के लिए सुविधा उपलब्ध है। खेल के अलावा, यह बोकारो के सामुदायिक जीवन का अभिन्न अंग है, जहाँ प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर मुख्य समारोह आयोजित होते हैं।21 नवंबर को स्टेडियम की स्वर्ण जयंती के अवसर पर एक समारोह आयोजित किया गया। अधिशासी निदेशक (मानव संसाधन) राजश्री बनर्जी ने एक गुब्बारा उड़ाकर कार्यक्रम का की शुरुआत की और इस पल को यादगार बनाया। इस दौरान कई पुराने खिलाड़ियों, एथलीटों तथा स्पोर्ट्स विभाग से जुड़े कार्मिकों को शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।यह स्वर्ण जयंती वर्ष केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि इस विरासत को संजोने और इसे अगले 50 वर्षों के लिए तैयार करने का एक संकल्प है, जो बोकारो स्टील प्लांट की प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रतिबिंबित करता है।

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