हिंदी दिवस पर आयोजित किए गए कई कार्यक्रम

साहिबगंज
हिंदी दिवस के अवसर पर साहिबगंज जिले में अनेकों कार्यक्रम आयोजित किए गए। राजमहल स्थित मॉडल कॉलेज में प्राचार्य डॉ रंजित कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा बने अब लोगो में यह सोच विकाशित करनी होगी। प्राचार्य डॉ रंजित कुमार सिंह ने कहा कि हिंदी एक ऐसी भाषा है जो पूरे देश को जोड़ती है।उन्होंने कहा कि हिंदी के बिना हर भाषा अधूरा है।उन्होंने कहा कि हिंदी का सम्मान करना चाहिए।क्युकी हिंदी केवल एक भाषा ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी है।उन्होंने कहा कि हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जो पूरे देश को एक सूत्र में बांधती है।
वही दूसरी ओर नेहरू युवा केंद्र ने साहिबगंज सदर प्रखंड के हाजीपुर पंचायत भवन में हिंदी दिवस समारोह आयोजित किया।इस मौके पर नेहरू युवा केंद्र साहेबगंज सदर प्रखंड राष्ट्रीय स्वयंसेवक चंदन कुमार और कौशर अंसारी ने हाजीपुर पश्चिम पंचायत भवन में सुभाष चंद्र और शक्ति युवा क्लब के साथ संयुक्त रूप से हिंदी दिवस मनाया ।चंदन कुमार ने संबोधित करते हुए बताया की राष्ट्रीय हिन्दी दिवस” प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है। प्रबुद्ध सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा0 श्री प्रकाश बरनवाल का कहना है कि 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने यह निर्णय लिया कि हिन्दी संघ सरकार की आधिकारिक भाषा होगी। क्योंकि भारत मे अधिकतर क्षेत्रों में ज्यादातर हिन्दी भाषा बोली जाती थी इसलिए हिन्दी को राजभाषा बनाने का निर्णय लिया और इसी निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को प्रत्येक क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये वर्ष 1953 से पूरे भारत में 14 सितम्बर को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद हिन्दी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थापित करवाने के लिए काका कालेलकर, हजारीप्रसाद द्विवेदी, सेठ गोविन्ददास आदि साहित्यकारों को साथ लेकर व्यौहार राजेन्द्र सिंह ने अथक प्रयास किये।मौके पर उपस्थित कौशर अंसारी ने बताया कि वर्ष 1918 में गांधी जी ने हिन्दी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राजभाषा बनाने को कहा था। इसे गांधी जी ने जनमानस की भाषा भी कहा था।[1] वर्ष 1949 में स्वतंत्र भारत की राजभाषा के प्रश्न पर 14 सितम्बर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जो भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की अनुच्छेद 343(1) में इस प्रकार वर्णित है.[2][3] संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अन्तरराष्ट्रीय रूप होगा।[4]

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