खूंटी में वोटिंग के अलग अलग मतलब निकाल रहे लोग
रांची: झारखंड में लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में चार सीटों पर हुए मतदान में एक सीट पर इंडी गठबंधन के खाते में जाने की पूरी संभावना दिख रही है। खूंटी जो सुरक्षित सीट है और जहां ईसाई वोटर किसी भी प्रत्याशी के जीत और हार तय करती है। इसके अलावा सरना आदिवासी, सदान वोटर भी इस गेम में महत्वपूर्ण रोल अदा करते हैं। इस बार के चुनाव में ईसाई वोटर के साथ साथ सदान और आदिवासी वोटर भी वर्तमान व्यवस्था के खिलाफ दिखे। इस बार इनलोगों का वोट एनडीए को नहीं के बराबर पड़ा है। मतदान स्थल पर खड़े अधिकांश मतदाताओं ने बदलाव की बात कही है। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि एनडीए का क्या होगा। वैसे कांग्रेस अपनी जीत को लेकर दावा कर रही है।
वहीं पलामू में राजद और भाजपा के बीच मुकबला हुआ है और इस मुकाबले में कही न कही राजद को बढ़त दिख रहा है। करीब एक दर्जन से अधिक मतदान स्थल पर मतदाताओं ने व्यवस्था परिवर्तन की बात कही है।
वहीं सिंहभूम और लोहरदगा सीट की बात करे तो यहां पर कांटे की टक्कर होने की पूरी संभावना देखी जा रही है।
सिंहभूम में गीता कोड़ा पहले से सांसद हैं और उनका उस क्षेत्र में बेहतर पकड़ माना जा रहा है। वहीं जोबा मांझी भी कम नहीं हैं,वे भी मंत्री रह चुकी हैं। उनके लिए सीएम चंपई सोरेन ने चुनावी कमान संभाला था।लेकिन इसके बावजूद भी गीता कोड़ा का पलड़ा भारी ही दिख रहा है। वहीं लोहरदगा की बात करे तो यहां पर निर्दलीय प्रत्याशी चमरा लिंडा और एनडीए प्रत्याशी प्रत्याशी समीर उरांव के बीच ही मुख्य मुकाबला हो गया है। इंडी गठबंधन प्रत्याशी सुखदेव भगत को यदि सॉलिड वोट पड़ जाता है तो इसमें एनडीए प्रत्याशी समीर उरांव की राह आसान हो जाएगी। यहां पर त्रिकोणीय मुकाबला हो गया है। यहां पर ऐसा भी हो सकता है कि कही निर्दलीय चमरा लिंडा निकल न जाए। लेकिन ऐसा नहीं होगा। यहां पर बहुत ही कम मार्जिन से एनडीए प्रत्याशी समीर उरांव के निकलने की पूरी संभावना है। वैसे चार जून को मतगणना के बाद ही स्थिति साफ होगी,तब तक कयासों का दौर जारी रहेगा।

