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पैरा ओलंपिक कमेटी ऑफ झारखण्ड की चुनाव प्रक्रिया में नियमों की हुई अनदेखी राज्य भर के खिलाड़ियों में आक्रोश दिव्यांग संघ

राँची:पैरा ओलंपिक कमेटी ऑफ झारखण्ड में दिव्यांग खिलाड़ियों को अंधकार में रखा जा रहा है झारखण्ड दिव्यांग आंदोलन संघ के अध्यक्ष ओम प्रकाश कहते है कि चुनाव प्रक्रिया में चुनाव नियमों को ताक में रखकर चुनावी प्रक्रिया कर स्वघोषित अध्यक्ष,सचिव चुन लिया गया पूरे राज्य भर के किसी भी दिव्यांग खिलाड़ियों नहीं बुलाया गया सिर्फ वही खिलाड़ी को बुलाया गया जो एक पक्षीय समर्थन में थे हालांकि आयोजन में हंगाम भी जे डी एस ए के अध्यक्ष ओम प्रकाश के द्वारा किया गया था लेकिन आवाज को दबाने का प्रयास बहुत जोर से किया गया हमलोग दबने वाले में से नहीं है इसकी जोरदार विरोध जारी है जहां चुनाव हो रहा था वहां पर न तो कोई खेल विभाग के अधिकारी मौजूद थे न वर्तमान अध्यक्ष को बुलाया गया था ऐसे में तो यह प्रतित होता है कि बिल्कुल अपने जेब भरने के लिए एक पक्षीय चुनाव करवाया गया है इस चुनाव को रद्द कर पुनः खेल विभाग के अधिकारियों के समक्ष निष्पक्ष चुनाव होनी चाहिए। इस चुनाव से राज्य भर के खिलाड़ियों में आक्रोश है।

क्या कहते है वर्तमान अध्यक्ष

“के.अग्रवाल कहते है कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है चूंकि चुनाव खेल विभाग के अधिकारीयो एवं राज्य भर के खिलाड़ियों के मौजदूगी में चुनाव प्रक्रिया होनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हुआ है गलत तरीके से हुए चुनाव को रद्द कर पुनः चुनाव करवाया जाए।”

क्या कहते है खेल विभाग के सचिव

खेल विभाग का कहना है कि जब कमेटी भंग हुई होगी तो उसकी सूचना खेल विभाग को देनी थी उसके बाद ही चुनावी प्रक्रिया करना उचित होती हालांकि कोई लिखित शिकायत नहीं आई है आने पर विधि सम्मत करवाई की जाएगी।

क्या कहते है दिव्यांग खिलाड़ी

प्रेम कुमार जो कि कई बार राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन कर चुके हैं इनका कहना है हमे कोई सूचना ही नहीं दी गई कि चुनाव हो रही है अचानक पता चला कि सब कुछ बदल सा गया है गलत तरीके से हुए चुनाव को रद्द किया जाए।

बहुत सारे ऐसे खिलाड़ी है जो नाम न छापने के शर्त पर कहा यह चुनाव से हमलोग बिल्कुल निराश इस तरह के चुनाव को रद्द कर पुनः राज्य भर के खिलाड़ियों के मौजदूगी में चुनाव प्रक्रिया संपन्न की जाए।

दिव्यांग खिलाड़ियों ने कहा खास कर स्वघोषित सचिव बने कुमार गौरव के खिलाफ सभी खिलाड़ियों में आक्रोश है वे किसी से भी ठीक से बात नहीं करते है सिर्फ अपनी गंदे शब्दों का करते है प्रयोग हमलोग इस तरह के सचिव नहीं चाहते है।

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