बड़ी बारीकी से परखी जाती है लड़कियाँ,
ब्याहे जाने से पहले
देखे जाते है उनके
नाक,नक्स ,उनका गोरा रंग
बात की जाती है उनके चरित्र की
देखा जाता है उनके उठने,बैठने
और बोलने का ढंग।
पूछा जाता है उनसे रहने ,खाने
और सहने का सलीका
समझा जाता है उनके सजने
और संवरने का तरीका।
पर उन्हें परखा जाना चाहिए
अलग पैमाने पर ,
देखा जाना चाहिए उनके
आखों में मरे ख्वाबों के श्मशान को
उनके बेरंग हो चुके रंगो के आसमान को
बात होनी चाहिए उनके कैनवास पर
उतारे गए चित्रों की ,
और अततः समझा जाना चाहिए
उनके द्वारा सजाए और
अलंकृत की गई कविताओं को
जिन्हें वे अपनी कल्पना लोक से
किसी बोझ के तले
अपनों तक नहीं ले आ पाई।

