अस्पताल से एंबुलेंस नहीं मिलने पर कंधे में शव लेकर पैदल गए स्वजन

लातेहार : सदर थाना क्षेत्र के कोमो नर्सरी के समीप नगर पंचायत के एक सफाई कर्मी की मौत घटना स्थल पर होने और एक महिला सफाई कर्मी के घायल होने की घटना से गुरुवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने रोषपूर्ण प्रदर्शन किया। दरअसल दुर्घटना में घायल को रिम्स रेफर किया गया था, मगर सदर अस्पताल में समय से एंबुलेंस नहीं मिलने पर आदिवासियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए अस्पताल प्रबंधक के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। गुरुवार की सुबह 11.30 बजे मृतक विनोद उरांव का पोस्टमार्टम करने के बाद ग्रामीणों ने अस्पताल की व्यवस्था से क्षुब्ध होकर कंधे में शव को लेकर पैदल निकल गए। इस दौरान अस्पताल प्रबंधक के द्वारा शव ले जाने के लिए मोक्ष वाहन भी दिया गया। परंतु आक्रोशित स्वजनों ने शव को कंधे में टांगकर पोस्ट ऑफिस के समीप आधे घंटे तक सड़क जाम कर दिया। इसके बाद थाना चौक के नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे। जहां आक्रोशित लोगों ने नगर पंचायत पदाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए। ग्रामीणों ने कहा कि छुट्टी के दिन भी एक मजदूर से मजदूरी करवाया गया है। जो संविधान एवं कानून का उल्लंघन है। ग्रामीणों ने कहा कि दुर्घटना के 20 घंटा बीत जाने से बावजूद भी नगर पंचायत के पदाधिकारी और न ही कोई एनजीओ के कर्मी पहुंचकर संवेदना तक व्यक्त नहीं की है। इस दौरान ग्रामीणों ने रांची पलामू मुख्य मार्ग को आधे घंटे तक जाम कर दिया। जाम की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी सुरेंद्र महतो पहुंचे और मृतक के स्वजनों से बात कर जाम हटाने की बात कही। लेकिन स्वजनों के द्वारा अस्पताल प्रबंधक पर कार्रवाई व मृतक के आश्रितों को मुआवजा व सरकारी नौकरी की मांग को लेकर जमे रहे। आदिवासी नेता सुकू उरांव ने कहा आदिवासी के इलाज को ले जाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराया गया। जब हमलोग अपने हक अधिकार के लिए सड़क जाम कर रहे हैं, तो पुलिस द्वारा दबाव बनाया जा रहा है।

दाह संस्कार के लिए तत्काल 50 हजार रुपये की दी सहायता राशि : आदिवासी समाज के द्वारा नगर पंचायत का घेराव करने के बाद इसकी सूचना नगर प्रशासक राजीव रंजन को मिलते ही स्थल पर पहुंचकर शव का अंतिम संस्कार करने के लिए तत्काल 50 हजार रुपये उपलब्ध कराया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि कागजी कार्रवाई करने के बाद सरकारी प्रावधानों के अनुसार शेष राशि का भुगतान किया जाएगा। उन्होंने मृतक के एक आश्रित को भी नौकरी देने की भी बात कही। इस आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए और प्रदर्शन समाप्त किया। शव को घर ले जाने के लिए मोक्ष वाहन भी उपलब्ध कराया गया। जिस पर शव लेकर ग्रामीण गंतव्य के लिए रवाना हो गए।

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