बाढ़ बनी काल: जिले में डूबने से चार की मौत

भागलपुर। बाढ़ सबसे आम प्राकृतिक आपदा है और तब आती है जब पानी का अतिप्रवाह आमतौर पर सूखी ज़मीन को जलमग्न कर देता है । बाढ़ अक्सर भारी वर्षा, तेज़ी से बर्फ पिघलने या तटीय क्षेत्रों में उष्णकटिबंधीय चक्रवात या सुनामी के कारण आने वाले तूफ़ानी उछाल के कारण आती है। बारिश और गंगा के उफनते जल ने एक बार फिर ज़िंदगी पर कहर बरपा दिया है। बीते शनिवार का दिन जिले के लिए बेहद मनहूस साबित हुआ। अलग-अलग स्थानों पर डूबने की घटनाओं में चार लोगों की जान चली गई — इनमें एक 9 वर्षीय मासूम, एक बुजुर्ग महिला और दो अन्य ग्रामीण शामिल हैं। प्रशासन की चेतावनी के बाद भी युवा वर्ग बाढ़ग्रस्त इलाके में पुल – पुलिया से तेज धार में छलांग लगाते देखे जा रहे हैं। खतरे से खेल रहे हैं। ये घटनाएं सिर्फ आंकड़े नहीं, टूटे हुए परिवारों की कहानियां हैं। बाढ़ के दो मुख्य प्रकार हैं: अचानक आने वाली बाढ़ और व्यापक नदी बाढ़। अचानक आने वाली बाढ़ से आम तौर पर जान-माल का ज़्यादा नुकसान होता है, जबकि नदी बाढ़ से आम तौर पर संपत्ति का ज़्यादा नुकसान होता है।

नींद में ही चली गई जान

सबौर के ममलखा वार्ड संख्या 10 की 65 वर्षीय कुंती देवी की मौत ने दिल दहला दिया। घर में घुसे बाढ़ के पानी ने जब ज़मीन को तालाब बना दिया, तब वह चौकी पर सोई हुई थीं। अचानक फिसल कर पानी में गिर गईं और डूबने से उनकी मौत हो गई। जब तक परिवार के लोग कुछ समझ पाते, बहुत देर हो चुकी थी।

खेलते-खेलते काल ने निगल लिया मासूम शिवम को

पीरपैंती के परशुरामपुर में महेश चौधरी का 9 साल का बेटा शिवम शनिवार सुबह खेलते-खेलते घर के पीछे बने गड्ढे में गिर गया। गड्ढा बाढ़ के पानी से लबालब भरा हुआ था। कुछ ही देर में उसका शव पानी में उपलता मिला। इस हादसे ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया।

शौच से लौटते वक़्त फिसला कदम, जीवन की डोर टूटी

सन्हौला थाना क्षेत्र के सोनूडीह गांव में 62 वर्षीय शिव यादव की मौत भी बाढ़ के पानी में डूबने से हुई। वह शौच के लिए घर के पीछे गए थे। लौटते समय पैर फिसल गया और वे गहरे पानी में समा गए।

नाथनगर में दो और मौतें, एक मामला दर्ज

नाथनगर क्षेत्र में दो और डूबने की घटनाएं देर शाम सामने आईं, लेकिन इनमें से केवल एक मामले में थाने में यूडी केस दर्ज किया गया है। दूसरे में परिजन शव को स्वयं घर ले गए।

प्रशासन लगातार चेतावनी दे रहा है कि बाढ़ के पानी में अनावश्यक रूप से न जाएं, रिल्स नहीं बनाएं लेकिन लापरवाही जान पर भारी पड़ रही है। खासकर युवा वर्ग बाढ़ग्रस्त इलाके में पुल – पुलिया से तेज धार में छलांग लगाते देखे जा रहे हैं। खतरे से खेल रहे हैं। ये घटनाएं सिर्फ आंकड़े नहीं, टूटे हुए परिवारों की कहानियां हैं।

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