प्रगतिशील लेखक संघ झारखंड का पांचवां राज्य सम्मेलन संपन्न, रणेन्द्र बने कार्यकारी अध्यक्ष
रामगढ़: प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस), झारखंड का पांचवां राज्य सम्मेलन रामगढ़ में वैचारिक विमर्श, काव्य पाठ और नई कार्यकारिणी के गठन के साथ संपन्न हुआ। सम्मेलन के दूसरे दिन साहित्य, समाज और समकालीन चुनौतियों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। इस दौरान दिवंगत साहित्यकारों को श्रद्धांजलि देते हुए शोक प्रस्ताव भी पारित किया गया।
सम्मेलन के पहले सत्र ‘इक्कीसवीं सदी में पूंजीवाद का स्वरूप और लेखकीय चुनौती’ में कथाकार रणेन्द्र ने पूंजीवाद के बदलते स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कृत्रिम मेधा पूंजीवाद, तकनीकी सामंतवाद और जैव साम्राज्यवाद जैसे समकालीन मुद्दों को रेखांकित किया। कथाकार पंकज मित्र ने कहा कि समय के यथार्थ को पहचानना आज की सबसे बड़ी चुनौती है। लेखक शेखर मल्लिक ने संकट के बीच मौजूद संभावनाओं पर विचार रखा, जबकि शैलेंद्र ने लेखकों से अपने रचनात्मक क्षितिज का विस्तार करते हुए नए सवालों से जूझने का आह्वान किया।
दूसरे सत्र ‘समय के संकट और लेखन की चुनौती—संदर्भ : प्रेमचंद और समकालीन विमर्श’ की अध्यक्षता महादेव टोप्पो ने की। उन्होंने आदिवासी संघर्ष की समृद्ध परंपरा पर चर्चा की। वक्ता गजेंद्र ने प्रेमचंद के साहित्य को अपने समय का इतिहास और आलोचना की कसौटी बताया।
समापन सत्र में मुख्य अतिथि सुखदेव सिंह सिरसा ने नए लेखकों से रचनाधर्मिता और जनपक्षधरता बनाए रखने की अपील की। कवि प्रवीण परिमल समेत दिवंगत साहित्यकारों को श्रद्धांजलि दी गई। विभिन्न भाषाओं के कवियों ने काव्य पाठ किया। अहमद बद्र, प्रो. मिथिलेश, सत्यम, संजय सोलोमन, अर्पिता समेत कई साहित्यकार और प्रबुद्धजन मौजूद रहे। राष्ट्रगान के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।
नई कार्यकारिणी 2026-28
नई कार्यकारिणी में रणेन्द्र को कार्यकारी अध्यक्ष और प्रो. मिथिलेश को महासचिव बनाया गया है। शेखर मल्लिक को उपमहासचिव तथा डॉ. भारती को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। अध्यक्ष मंडल में महादेव टोप्पो, प्रो. अहमद बद्र, निशी प्रभा और डॉ. बी.एन. मोहदार शामिल हैं। वहीं संरक्षक मंडल में शशि कुमार, प्रो. रामानंद, जयनंदन और डॉ. (मो.) जकरिया को शामिल किया गया है।


