भागलपुर में चुनावी महायुद्ध तय, सातों सीटों पर,मुकाबला फाइनल, अब किसके सिर सजेगा ताज?
भागलपुर। बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं और भागलपुर ज़िले की सातों विधानसभा सीटों पर चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ हो गई है। नामांकन की अंतिम तिथि के साथ ही प्रत्याशियों की सूची फाइनल हो चुकी है। एनडीए और महागठबंधन अपने-अपने प्रत्याशियों के साथ मैदान में डट गए हैं, और सियासी पारा तेजी से चढ़ रहा है।
सात सीटों पर समीकरण दिलचस्प मुकाबले। सुल्तानगंज: मंडल बनाम कुमार। अनुभव या नई उम्मीद? एनडीए (जदयू): ललित नारायण मंडल, महागठबंधन (कांग्रेस): ललन कुमार। यहां दो पुराने प्रतिद्वंद्वी एक बार फिर आमने-सामने हैं। मंडल की क्षेत्र में मजबूत पकड़ है, लेकिन ललन कुमार का भी ज़मीनी जनाधार कम नहीं। चुनाव प्रचार जोरों पर है।
नाथनगर: युवा जोश बनाम अनुभवी रणनीति
एनडीए (लोजपा-रामविलास): मिथुन यादव, महागठबंधन (राजद): ज़ेड हसन, जन सुराज: अजय राय। यह सीट इस बार युवाओं की प्राथमिकता का संकेत दे सकती है। मिथुन यादव के पास संगठन का अनुभव है, वहीं ज़ेड हसन का प्रभाव मुस्लिम मतदाताओं पर है। अजय राय भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में हैं।
भागलपुर (शहरी): भाजपा बनाम कांग्रेस, प्रतिष्ठा की लड़ाई। एनडीए (भाजपा): रोहित पांडेय, महागठबंधन (कांग्रेस): अजीत शर्मा। यह सीट सीधे भाजपा और कांग्रेस के बीच है। अजीत शर्मा लगातार सक्रिय रहे हैं, जबकि रोहित पांडेय दूसरी बार चुनौती दे रहे हैं। शुरुआती गुटबाज़ी के बाद अब दोनों ओर से एकजुटता दिखाई जा रही है, हालांकि भीतरघात की संभावना बनी हुई है।
कहलगांव: चतुर्ष्कोणीय संघर्ष में उलझा मैदान। चुनावी मैदान में एनडीए (जदयू) शुभानंद मुकेश, राजद रजनीश यादव, कांग्रेस: प्रवीण सिंह कुशवाहा, निर्दलीय पवन यादव (बागी) प्रमुख चेहरे हैं। इस सीट पर मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। बागी उम्मीदवार पवन यादव के मैदान में आने से समीकरण दिलचस्प हो चुका है। वोटों का बंटवारा तय है, जिससे परिणाम पर सीधा असर पड़ सकता है।
पीरपैंती: पासवान बनाम पासवान, नाम वही, नीति नई। यहां एनडीए (भाजपा) मुरारी पासवान, महागठबंधन (राजद): रामविलास पासवान चुनावी मैदान में हैं। यहां दोनों प्रत्याशियों का नाम एक होने के कारण मतदाता भ्रमित हो सकते हैं, लेकिन मुद्दे और जनाधार अलग हैं। जातीय समीकरण यहां अहम भूमिका निभा सकते हैं
गोपालपुर: निर्दलीय प्रत्याशी बना ‘गेमचेंजर’
एनडीए (जदयू): बुलो मंडल,महागठबंधन (वीआईपी) डब्लू यादव, निर्दलीय चेहरे के रूप में बागी गोपाल मंडल हैं। यहां गोपाल के निर्दलीय चुनाव लड़ने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए अन्य प्रत्याशियों की रणनीति भी प्रभावित हुई है।
बिहपुर: इंजीनियर बनाम बागी, निर्णायक होंगी महिला वोटर। यहां एनडीए (भाजपा): इंजीनियर शैलेन्द्र, महागठबंधन (वीआईपी) अर्पणा कुमारी
जन सुराज पवन चौधरी के बीच टक्कर तय है। इस सीट पर महिला उम्मीदवार अर्पणा कुमारी के सामने भाजपा के शैलेन्द्र और जन सुराज के पवन चौधरी चुनौती पेश कर रहे हैं। महिला वोट निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
भागलपुर की सातों सीटों पर जातीय समीकरण, सामाजिक मुद्दे और स्थानीय विकास सबसे अहम मुद्दे बने हुए हैं। कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय या चतुर्ष्कोणीय है, जिससे परिणाम अप्रत्याशित हो सकते हैं। अब देखना यह है कि क्या एनडीए अपने प्रदर्शन को दोहरा पाएगा या महागठबंधन इस बार बढ़त बनाएगा? मतदान 11 नवंबर को होगा, और परिणाम बताएंगे कि जनता ने किसे चुना अपना नेता।



