राजभवन और राज्य सरकार के आपसी खींचातान में 1932 खतियान वाले स्थानीयता विधेयक लटका गया : दिलीप मिश्रा
खूंटी: 1932 खतियान वाले स्थानीयता विधेयक को राजभवन से वापस होने के बाद सूबे में राजनीति तेज हो गई है। वहीं झाविमो के पूर्व जिला अध्यक्ष पॉलिटिकल नेता दिलीप मिश्रा ने कहा कि झारखंड अलग राज्य बनने से 22साल बाद भी यहां पर कोई भी सरकार स्थानीय नियोजन नीति नहीं बना पाई। स्थानीयता की परिभाषित करने में हमेशा कोई न कोई पेंच लगा देती ही। इससे स्थानीय नीति विधेयक बार बार लटक जा रही है।
राज्य सरकार अपनी राजनीति लाभ लेने के लिए अपनी गोटी सेक रही है और राजभवन केंद्र सरकार का मुखौटा बना हुआ है। राज्य और केंद्र सरकार के बीच में यहां के नौजवानों का भविष्य अंधकार में जा रहा है। उन्हें उम्र खत्म होने की आशंका सताए जा रही है।
श्री मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार यहां के नौजवानों के भविष्य को देखते हुए ठोस निर्णय ले और कानून के जानकारों से राय लेकर संवैधानिक ढंग से स्थानीयता की परिभाषित करे और विधेयक को फिर से राजभान भेजे।

