बिहार की सियासत में बड़ा धमाका, MLC चुनाव में PK समर्थित अफाक आलम का परचम
पटना : चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बनने के लिए पिछले 6 महीने से बिहार के गांव-गांव की खाक छान रहे प्रशांत किशोर (PK) को सियासी पंडित अब तक कोई खास तवज्जो नहीं दे रहे थे। लेकिन विधान परिषद चुनाव में उन्होंने अप्रत्याशित रूप से बडा धमाका कर दिया है। प्रशांत किशोर ने अपने साथ घूम रहे बेतिया के अफाक अहमद को सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी बनवा दिया है। इसी के साथ उन्होंने दिखला दिया कि उन्हें कमतर आंकना दूसरे दलों के बड़ी भूल हैं।बता दें कि अगले वर्ष 2024 में लोकसभा और 2025 में बिहार विधान सभा चुनाव होना है।
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में प्रशांत किशोर समर्थित उम्मीदवार अफाक आलम ने जीत का परचम लहराया है। इस सीट से सीपीआई के केदार पांडेय लगातार एमएलसी चुने जाते रहे हैं। उनके निधन के कारण उप चुनाव हुआ था। इस बार सीपीआई ने स्व. केदार पांडेय के बेटे आनंद पुष्कर को उम्मीदवार बना कर सहानुभूति लहर पैदा कर वोट बटोरने की कोशिश की थी। हालांकि उन्हें महागठबंधन का भी समर्थन था, बावजूद प्रशांत किशोर समर्थित अफाक अहमद सब पर भारी पड़े। अफाक अहमद को कुल 3055 वोट मिले। वहीं, महागठबंधन के प्रत्याशी आनंद पुष्कर को 2381 वोट मिले। शिक्षक संघ के नेता और निर्दलीय उम्मीदवार जयराम यादव उनसे कुछ ही वोटों से पीछे रहे और उन्हें 2080 वोट मिले। एक और निर्दलीय उम्मीदवार चंद्रमा सिंह को 1255 मत पड़े। भाजपा के उम्मीदवार धर्मेंद्र कुमार को सिर्फ 495 वोट से संतोष करना पड़ा।
बता दें कि प्रशांत किशोर पिछले 6 महीने से सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में ही घूम रहे हैं। इस शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में छपरा, सिवान, गोपालगंज के अलावा मोतिहारी और बेतिया जिले आते हैं। पिछले साल 2 अक्टूबर को प्रशांत किशोर ने बेतिया के भितिहरवा से अपनी जन सुराज यात्रा शुरू की थी। एमएलसी चुने गये अफाक अहमद पहले दिन से उनके साथ पदयात्रा में शामिल थे। प्रशांत किशोर बेतिया, मोतिहारी, गोपालगंज, सिवान के बाद फिलहाल छपरा जिले में ही पदयात्रा कर रहे हैं।
इस जीत के पीछे खास बिंदु यह रहा कि प्रशांत किशोर ने अपनी यात्रा के हर पडाव पर शिक्षकों के साथ संवाद जरूर करते थे। सारण यानि छपरा जिले की ही बात करें तो उन्होंने अमनौर औऱ बनियापुर में शिक्षकों के साथ बडी बैठक की थी। उन्होंने खुलकर अफाक अहमद के लिए वोट तो नहीं मांगा था लेकिन इशारों में ही बता दिया था कि अफाक अहमद की जीत उनके लिए कितना अहम है।
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार चुनाव जीतने वाले स्व. केदार पांडेय शिक्षकों के बडे नेता थे। उनके निधन के बाद जब उनके बेटे को टिकट मिला तो कई शिक्षक नेता चुनाव मैदान में उतर गये। शिक्षक संघ के नेता जयराम यादव निर्दलीय उम्मीदवार बन कर उतरे और 2080 वोट झटकने में कामयाब रहे। वहीं, चंद्रमा सिंह औऱ रंजीत कुमार भी शिक्षकों के ही नेता हैं। दोनों निर्दलीय चुनाव लडे और एक हजार से ज्यादा वोट हासिल किया। शिक्षक वोटों में इतनी बड़ी सेंधमारी के बावजूद अफाक आलम की जीत से अन्य भाजपा और महा गठबंधन, दोनों के कान खड़े हो गए हैं।
चुनाव रिजल्ट बताते हैं कि महागठबंधन का एमवाई दोनों वोट खिसक गया। जयराम यादव को दो हजार से ज्यादा वोट मिले तो उसमें वाई वोटरों का बड़ा योगदान रहा। उधर, सिवान में हिना शहाब की नाराजगी भारी पडी। हालांकि प्रशांत किशोर के उम्मीदवार खुद मुस्लिम थे, लिहाजा मुसलमानों का ज्यादातर वोट उनकी ही झोली में गिरे।

