सरना धर्म कोड की स्वीकृति को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर में आदिवासी समाज ने दिया धरना
रांची: राष्ट्रीय आदिवासी समाज सरना धर्म रक्षा अभियान के अनुषंगी संगठनों के तत्वावधान में देश के विभिन्न राज्यों से आए हुए लगभग एक हजार की भारी संख्या में दिल्ली स्थित जंतर मंतर पर महाधरना में शामिल हुए 21 राज्यों के प्रतिनिधि सहित नेपाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, भूटान मध्यप्रदेश, इत्यादि शामिल हुए ।
कार्यक्रम का अध्यक्षता धर्म गुरू बंधन तिग्गा ने किया। भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, जनजाति मामले की मंत्री रजिस्टर जनरल ऑफ इंडिया, जनगणना को सरना धर्म कोड की स्वीकृति के लिए तथा परिपत्र में पृथक कोड के रूप में अधिसूचित करने के लिए ज्ञापन सौंपा। मौके खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने कहा कि हम लोगों ने झारखंड विधान सभा सदन से सरना कोड का बिल पास कर केन्द्र सरकार के पास भेज दिए है। हमारे हर मौजा में सरना स्थल, मड़ाई है। हम धार्मिक आस्था से जुड़े हुए है। धर्म गुरू बंधन तिग्गा ने कहा कि आदिवासीयो को धर्म कोड देना चाहिए, इसके लिए आदिवासी समाज आंदोलित है, अब आदिवासी जाग चुके है, जब तक धर्म कोड नही दिया जाता है। शिक्षाविद डॉ. करमा उरांव ने कहा कि आजाद भारत में देश का मूल धर्म प्राकृति से जुड़ा मानव संस्कृति का आध्यात्मिक आयाम भारत के करोड़ों आदिवासीयो अलग धर्म कोड नही दिया जाना एक तरह से अन्याय है और क्रूर मजाक किया गया है।
केन्द्रीय सरना संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष शिवा कच्छप ने कहा कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री हमें हमारी धार्मिक आजादी दे दे। सरना धर्म कोड को अविलंब मान्यता देकर हमें जनगणना में मर्यादा के साथ शामिल होने का सौभाग्य प्रदान करे। यह संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मौलिक अधिकार है। अगर आदिवासीयो के लिए धर्म कोड नही होगा तो फिर आदिवासीयो की जनसंख्या घटा दी जाएगी। प्राकृति पूजक आदिवासीयो को आज मान्यता नही दी जा रही है, तभी इनके आस्था धर्म को जनगणना में शामिल नही किया गया है। लोकतांत्रिक देश में जनसंख्या से ही सबकुछ तय होता है। इसी के आधार पर नौकरी, आरक्षण, बजट आदि में भागीदारी मिलती है। धर्म कोड नही मिलने से आदिवासी सम्मानित महसूस नही करते। महाधरना को जिला परिषद अध्यक्ष निर्मला भगत, पूर्व सांसद सलखान मुर्मू , मध्यप्रदेश विधायक हीरालाल अल्वा, मनीलाल करकेंटा अनिल कुमार भगत, संजय पहान ने संबोधित किया किया। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से संगम उरांव, बिरसा कांडील, राजेश भगत, सुनील उरांव पूर्व जिला परिषद सदस्य, भगवान दास मुंडा, नारायण उरांव, रवि उरांव, दुर्गा ओड़िया मथुरा कंडील, प्रभात उरांव, राजदीप कच्छप, डब्लू , रायमनी उरांव, कमले उरांव, रेणु उरांव, बरगई ओड़िया आदि लोग उपस्थित थे।

