नारियल दिवस पर नारियल और कल्पतरु संरक्षण पर परिचर्चा
खूंटी: पृथ्वी लोक तरु संस्थान के तत्वावधान में बुधवार की शाम भगतसिंह चौक पर नारियल दिवस पर एक परिचर्चा आयोजित की गई। जिसमें नारियल और विलुप्त होते कल्पतरु वृक्षारोपण करने पर समसामयिक परिचर्चा हुई। पृथ्वी लोक तरु संस्थान के अध्यक्ष डॉ दीपक कुमार घोष ने कहा कि
नारियल एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्यवर्धक पेय और खाद्य है।इसका उत्पादन दक्षिण भारत सहित पश्चिम बंगाल के कुछ भागों में होता है, खाद्य के अलावा तेल के रूप में इस्तेमाल होता है। उन्होंने कहा कि दुर्लभ देववृक्ष कल्पतरु रांची में है।जिसका विस्तारण होने चाहिए। मुरहू के प्रकृति प्रेमी डॉ धर्मेंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि नारियल स्वास्थ्य के साथ साथ अर्थव्यवस्था में भी सुधार लाता है। देवलोक के वृक्ष कल्पतरु का संरक्षण भी बहुत जरूरी है। युवा ध्रुवेन्द्र भास्कर ने कहा कि नारियल को अक्सर “जीवन का वृक्ष” कहा जाता है, क्योंकि इसके फल, पानी, तेल, रेशा और खोल तक विभिन्न कार्यों में उपयोग होते हैं।
नारियल पानी प्राकृतिक पेय के रूप में लोकप्रिय है, जबकि नारियल का उपयोग खाद्य पदार्थों, तेल, सौंदर्य प्रसाधनों और विभिन्न घरेलू उत्पादों में किया जाता है। नारियल का रेशा रस्सी, चटाई और अन्य उत्पाद बनाने में भी काम आता है।भारत के कई तटीय राज्यों में नारियल किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। विश्व नारियल दिवस इस बहुउपयोगी फसल के संरक्षण, वैज्ञानिक खेती और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के प्रति जागरूकता का अवसर भी है। जितेन्द्र पांडे,अनुप राय, तुलसी प्रजापति आदि ने भी अपनी राय रखीं।



