ईश्वर चन्द्र विद्यासागर को याद किया
खूंटी: दीपांजलि साहित्य सेवा संस्थान के तत्वावधान में नीचे चौंक में दार्शनिक , समाजसेवी ,शिक्षाविद् ईश्वर चन्द्र विद्यासागर को 135वीं पुण्य तिथि पर लोगों द्वारा भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संबोधन में संस्थान के अध्यक्ष डॉ दीपक कुमार घोष ने ईश्वर चन्द्र विद्यासागर के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश के लाल ईश्वर चन्द्र विद्यासागर महान व्यक्तित्व के धनी थे,इनकी विद्वता के कारण इन्हें विद्यासागर की उपाधि प्रदान की गई।शिक्षा के प्रसार , समाज सुधार विशेषकर नारी उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।बाल विवाह,बहु विवाह का विरोध किया।कई ग्रंथों की रचना किया, संपादन किया। अपने प्रतिभा से बंगाल को विश्व पटल पर स्थापित किया । ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ने 18वर्ष 1873-1891तक झारखंड के जामताड़ा के करमाटाड़ में अपने निवास पर ग़रीब मजबूर आदिवासी बालिकाओं को निशुल्क पढ़ाया, चिकित्सा सेवा भी करते।बाद में भारत सरकार ने इस जगह विद्यासागर रेलवे स्टेशन का निर्माण किया,जो आज भी उनकी याद दिलाता है। मुरहू के समाजसेवी डॉ धर्मेंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ईश्वर पुत्र थे,जिनका जन्म गरीबों -शोषितों और बंचितों के उत्थान के लिए हुआ था। माता सरस्वती की कृपा उनपर सदा रही, देशहित, समाजहित कार्यों में सदा संलग्न रहे। भारत के गौरव को हमेशा ऊंचा रखा।ऐसे महामानव को देश कभी नहीं भुला सकता है।हम अपनी कृतज्ञता व्यक्त कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। जितेन्द्र पांडे, ध्रुवेन्द्र भास्कर,अनुप कुमार राय, तुलसी प्रजापति, किशोर ठाकुर, राधेश्याम भगत, विष्णु देव चौधरी, मनु साव,मिथिलेश ठाकुर ने भी महामना को याद कर अपना श्रद्धा सुमन अर्पित किया।


