नीलामी नहीं होने से झारखंड में बालू संकट गहराया, राजधानी रांची में कालाबाजारी का खेल तेज
रांची : झारखंड में बालू घाटों की नीलामी लंबित रहने के कारण राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में बालू संकट गहराता जा रहा है। इसका सीधा असर भवन निर्माण, सरकारी विकास योजनाओं और निजी निर्माण कार्यों पर पड़ रहा है। दूसरी ओर बालू की कमी का फायदा उठाकर अवैध कारोबारियों ने कालाबाजारी का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया है।
राजधानी रांची के विभिन्न इलाकों में खुलेआम बालू डंप किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। शहर के बाहरी क्षेत्रों और कई प्रमुख मार्गों के किनारे बड़ी मात्रा में बालू जमा कर रखा गया है, जहां से जरूरतमंद लोगों को मनमाने और ऊंचे दामों पर बालू बेचा जा रहा है। इससे आम उपभोक्ताओं और छोटे निर्माण कार्य कराने वाले लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बालू माफिया रात के अंधेरे या सुनसान समय में नदी घाटों से बड़े वाहनों के जरिए अवैध रूप से बालू का उठाव कर रहे हैं। इसके बाद शहर के विभिन्न स्थानों पर डंप कर उसकी बिक्री की जा रही है। बावजूद इसके प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई अपेक्षित स्तर पर नजर नहीं आ रही है।
निर्माण कार्यों से जुड़े व्यवसायियों का कहना है कि बालू की उपलब्धता नहीं होने से कई परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। मजदूरों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा होने लगा है। राज्य में बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने से स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
हालांकि सरकार अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। राजधानी में जगह-जगह बालू के डंप और ऊंचे दामों पर हो रही बिक्री प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। अब लोगों की नजर सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।



