किडनी कांड में 6 गिरफ्तार, 4 डॉक्टरों के खिलाफ लुक आउट नोटिस, आईसीयु में तड़प रहा बिहार का लाल

रांची (गणादेश) : मजबूरी की आग में जब सपने जलते हैं, तो इंसान अपनी ही देह का सौदा कर बैठता है।बिहार के समस्तीपुर का मेधावी छात्र आयुष, जो आंखों में एमबीए की डिग्री का सपना पाले था, आज कानपुर के हैलट अस्पताल में मौत से जंग लड़ रहा है। पढ़ाई की फीस भरने के लिए अपनी किडनी बेचने वाले इस छात्र ने तब इस नरभक्षी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया, जब दरिंदों ने अंग निकालने के बाद सौदे की रकम देने में भी गद्दारी कर दी.

ऑपरेशन के बाद आयुष की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई है। उसे विशेषज्ञ मेडिकल टीम की सघन निगरानी (आईसीयु) में रखा गया है। बेगूसराय की रहने वाली उसकी सहपाठी और प्रेमिका इस कठिन घड़ी में उसकी ढाल बनी हुई है। आयुष की सिसकियां व्यवस्था के उस चेहरे को उजागर कर रही हैं, जहां एक छात्र को किताब पकड़ने के लिए अपना अंग गंवाना पड़ा।

पुलिस का सरहदों पर सख्त पहरा

कानपुर पुलिस ने इस मामले में 6 आरोपियों को जेल भेजने के बाद अब मास्टरमाइंड डॉक्टरों की घेराबंदी तेज कर दी है : फरार चल रहे 4 मुख्य डॉक्टरों के खिलाफ पुलिस ने लुक आउट नोटिस जारी किया है, जिससे उनके विदेश भागने के रास्ते बंद हो गए हैं। पुलिस की एक स्पेशल टीम मेरठ के उस अस्पताल में डेरा डाले हुए है, जहां से इस गैंग के नेटवर्क से जुड़े बेहद सनसनीखेज इनपुट मिले हैं। इधर लखनऊ और नोएडा में छिपे इन कसाइयों की धरपकड़ के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी जारी है। गौरतलब हो की यह मामला अब केवल एक अपराध नहीं, बल्कि चिकित्सा जगत के उस कलंक की दास्तां है जिसने चंद रुपयों के लिए एक मेधावी भविष्य को दांव पर लगा दिया। पुलिस अब इन डॉक्टरों की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी में है।

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