सारंडा वन क्षेत्र में निवासियों का विस्थापन नहीं होगा, योजनाओं का लाभ सुनिश्चित : हेमंत सोरेन
गणादेश,रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में साफ कर दिया कि सारंडा वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों का विस्थापन कतई नहीं होगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपना औपचारिक जवाब दाखिल करेगी।
सीएम ने कहा कि जंगल, जल और जमीन से जुड़े मामलों में वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों के अधिकारों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। वन अधिकार कानून का पालन करते हुए किसी भी हालत में स्थानीय निवासियों को उनके घर और जंगल से बाहर नहीं निकाला जाएगा। साथ ही, केंद्र और राज्य सरकार की तमाम योजनाओं का लाभ सीधे तौर पर इन लोगों तक पहुंचाने का विशेष इंतजाम किया जाएगा। हेमंत सोरेन ने कहा कि सारंडा जंगल में इन लोगों का बसेरा सदियों पुराना है और उनका हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में है।
घाटशिला उपचुनाव को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही इस पर विस्तृत जानकारी जनता के सामने रखी जाएगी। भाजपा के स्टार प्रचारकों के सवाल पर उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, “हाथी हाथी होता है और चूहा चूहा। जिसको जैसे साधन मिलते हैं, वह उसी साधन से काम करता है। नेचर और सिग्नेचर नहीं बदलते।”
मुख्यमंत्री के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया कि राज्य सरकार वनवासियों के अधिकारों और सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए उनकी सामाजिक और आर्थिक भलाई के लिए प्रतिबद्ध है।

