आदिवासियों के संवैधानिक प्रावधानों को दरकिनार किया जा रहा है : बोदरा

खूंटी: खूंटी प्रखंड के मारंगहदा क्षेत्र के हातु मुंडाओं संग “पांचवीं अनुसूची दिवस” आज पंचायत भवन, डाड़ीगुटू में पड़हा राजा फूलचंद टुटी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए झारखण्ड उलगुलान संघ के संयोजक अलेस्टेयर बोदरा ने कहा कि पांचवीं अनुसूची भारतीय संविधान का हिस्सा है तो यह मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा का देन है। संविधान सभा की बैठकों में उनके द्वारा आदिवासियों की ऐतिहासिकता तथा हित के लिए पुरजोर वकालत किया गया। यह और बात है कि संविधान के प्रारूप के धारा 13(5) में आदिवासियों को आदिवासी शब्द से सम्बोधित करने बावजूद अंतिम समय में अनुसूचित जनजाति के नाम से परिभाषित किया गया।
बोदरा ने आगे कहा कि संविधान निर्माण के समय से आदिवासियों के साथ किया जा रहा छल प्रपंच आज तक जारी है। आदिवासियों के संवैधानिक प्रावधानों तथा कानूनी अधिकारों को दरकिनार किया जा रहा है। झारखण्ड उलगुलान संघ इस विषय पर गंभीर है, इसी के मद्देनजर 11 नवंबर के राजभवन के समक्ष महाधरना कार्यक्रम से माननीय राज्यपाल महोदय तथा झारखण्ड सरकार को यह संदेश देना चाहेगी कि आदिवासियों के अस्तित्व, अस्मिता एवं स्वाभिमान से खिलवाड़ बंद हो, अब आदिवासी किसी भी अन्याय को बर्दास्त नहीं करेगा।
इस कार्यक्रम को मसीहदास गुड़िया, जोन जुरसेन गुड़िया, ठाकुरा मुंडा, चैतन मुंडा, नंदराम मुंडा, जोसेफ हस्सा, दाहरू मुंडा, मुईसू पाहन, एतवा मुंडा, सुखराम टुटी, बरनाबास टुटी, नारायण सिंह मानकी एवं जैतून टुटी आदि ने सम्बोधित किया।

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