बिहार कृषि विश्वविद्यालय में ‘मिलेट्स कॉर्नर’ का भव्य उद्घाटन,कुलपति, जिलाधिकारी एवं वैज्ञानिकों की उपस्थिति में शुरू हुआ नवाचार का नया केंद्र
भागलपुर। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के खाद्य विज्ञान एवं फसलोत्तर प्रौद्योगिकी विभाग में मंगलवार को ‘मिलेट्स कॉर्नर’ का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह, भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, विश्वविद्यालय के डीन, निदेशकगण, विभागाध्यक्ष एवं वैज्ञानिकगण उपस्थित थे। यह आयोजन विश्वविद्यालय की नवाचार, अनुसंधान और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नवाचार की झलक: मिलेट्स और स्थानीय फलों से बने उत्पाद
मिलेट्स कॉर्नर में मोटे अनाज (मिलेट्स) पर आधारित विविध उत्पादों का प्रदर्शन किया गया, जिनमें कुकीज़, केक, कपकेक के साथ-साथ कई प्रकार के स्वस्थ और स्वादिष्ट बेकरी उत्पाद शामिल थे। इसके अलावा, विभाग द्वारा विकसित आम, बेल, नींबू, अमरूद, अनानास आदि से बने शरबत, जेली, जैम और चटनियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। ये उत्पाद विभाग की बाज़ार-उन्मुख प्रौद्योगिकी, स्थानीय संसाधनों का उपयोग, और स्वदेशी खाद्य उत्पादों के नवाचार की स्पष्ट मिसाल पेश करते हैं।
इस पहल का नेतृत्व विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद वसीम सिद्दीकी ने किया, जिनके मार्गदर्शन में विभाग के वैज्ञानिकों ने संयुक्त प्रयास से मिलेट्स कॉर्नर की स्थापना की। इस कॉर्नर का उद्देश्य न केवल छात्रों और शोधकर्ताओं को व्यावसायिक कौशल प्रदान करना है, बल्कि किसानों और उद्यमियों को भी नई संभावनाओं से जोड़ना है। डॉ. सिद्दीकी ने बताया कि यह मंच विभाग के छात्रों व संकाय को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और बाजार से जोड़ने का अवसर देगा।
इस अवसर पर जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने विश्वविद्यालय के नवाचार की सराहना करते हुए सुझाव दिया कि सैंडिस कंपाउंड जैसे सार्वजनिक स्थानों पर विश्वविद्यालय को स्थायी आउटलेट खोलने पर विचार करना चाहिए ताकि ये उत्पाद आम जन तक पहुंच सकें। उन्होंने कहा, मुझे आज यह जानकर आश्चर्य हुआ कि मिलेट्स के 10 से अधिक प्रकार होते हैं, जिनमें माइक्रो और मैक्रो दोनों वैरायटीज़ शामिल हैं। यहां उन पर रिसर्च के साथ-साथ प्रोडक्शन और प्रोसेसिंग भी हो रही है, जो बिहार के लिए एक नई दिशा है। एक चिकित्सक के रूप में जिलाधिकारी ने मिलेट्स को स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी बताते हुए लोगों से इसके अधिक उपयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि मिलेट्स ऐसे अनाज हैं जो कम खाद और कम जल में भी उगाए जा सकते हैं। इससे किसानों को लागत में राहत के साथ-साथ बेहतर उत्पाद भी मिल सकता है।
कुलपति का जोर – युवा, किसान और उद्यमी बनें आत्मनिर्भर
कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय युवाओं, किसानों और स्थानीय उद्यमियों को खाद्य प्रसंस्करण में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए संकल्पित है। उन्होंने मिलेट्स कॉर्नर को कृषि आधारित आजीविका संवर्धन का एक अहम माध्यम बताया।



