एस आई आर पर कांग्रेस के आरोप बेबुनियाद और मनगढ़ंत:आदित्य साहू
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है।लोकतंत्र के प्रति भारतीय जनमानस की आस्था सदियों पुरानी रही है। लोकतंत्र हम भारतीयों के स्वभाव, व्यवहार और आचरण में है। संसदीय लोकतंत्र की मर्यादा और परंपरा के प्रति भारत के आम लोगों की आस्था अभूतपूर्व रही हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में लोकतंत्र की मजबूती एवं देश के चतुर्दिक विकास से जहां एक ओर प्रत्येक भारतवासी गौरवान्वित महसूस कर रहा है वहीं इसने ऐसी शक्तियों को बेचैन कर दिया है जो नहीं चाहती कि भारत में शांति और स्थिरता बनी रहे तथा भारत का लोकतंत्र मजबूत रहे। भारत में अशांति और अस्थिरता की इच्छा रखने वाले लोगों द्वारा इस प्रकार का षड्यंत्र रचा जा रहा है जिससे भारत में अराजकता फैले। ऐसी शक्तियां भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। इससे बड़ी दुर्भाग्य की बात क्या हो सकती है कि इन शक्तियों का नेतृत्व प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस कर रही है तथा चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर मनगढ़ंत आरोप लगाकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।
इतिहास साक्षी है कि जब-जब भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है, देश के आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है, भारत आर्थिक और सामरिक दृष्टिकोण से मजबूत होता है तब तब कांग्रेस एवं वामपंथी दलों के दिल और दिमाग में बेचैनी छा जाती है। इसी बेचैनी में वे आज इस प्रकार के अराजक आंदोलन कर रहे हैं जो राष्ट्र हित में नहीं है। कांग्रेस एवं इंडी गठबंधन द्वारा जिस प्रकार से जंतर मंतर से लेकर रामलीला मैदान तक लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति दुष्प्रचार किया गया वह दुर्भाग्यपूर्ण है। सदन में चर्चा से भागने वालों द्वारा मॉक पार्लियामेंट का आयोजन कर जन महाभियोग कार्यक्रम करना लोकतांत्रिक मर्यादा के प्रतिकूल है। मॉक पार्लियामेंट की विफलता ने यह साबित कर दिया है कि इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ जनता नहीं है।

कांग्रेस का चरित्र ही लोकतंत्र विरोधी रहा है। 1975 का आपातकाल हो या 356 का प्रयोग कर चुनी हुई दर्जनों सरकारों को बर्खास्त करने के अलोकतांत्रिक कार्य हो, इन सभी को कांग्रेस ने अंजाम दिया है। वर्तमान समय में भी जब चुनाव आयोग द्वारा SIR विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है तो कांग्रेस एवं वामपंथी दलों को यह रास नहीं आ रहा है तथा वे इस पवित्र कार्य के प्रति लोगों में भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।
लोकतंत्र की मजबूती के लिए चुनावी व्यवस्था का पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय होना अनिवार्य शर्त है। एस आई आर को इसी व्यापक संदर्भ में समझने की आवश्यकता है। भारत का संविधान प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार देता है निष्पक्ष चुनाव के लिए शुद्ध मतदाता सूची का होना अनिवार्य शर्त है SIR द्वारा मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण कर विसंगतियों की पहचान करना तथा पात्र मतदाता को जोड़ने का काम होता है। इसके तहत अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत और दोहरी पंजीकरण वाले मतदाताओं की पहचान कर उन्हें हटाया जाता है। नाम, पता ,उम्र एवं अन्य गलत विवरण में सुधार होता है नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं वैसे मतदाता जो पात्र हैं परंतु उनका नाम सूची में नहीं है तो उनके नाम को जोड़ा जाता है । यह सर्वविदित है कि SIR की यह प्रक्रिया कोई पहली बार नहीं हो रही है, इसके पूर्व भी 10 बार SIR की प्रक्रिया हो चुकी है जिनमें अधिकांश समय कांग्रेस के प्रधानमंत्री थे।
दरअसल कांग्रेस नहीं चाहती कि भारत का लोकतंत्र मजबूत हो। परिवारवाद और तानाशाही प्रवृति वाले कांग्रेसियों को भारत की आम जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की चिंता कैसे हो सकती है। उन्हें तो येन केन प्रकारेण सत्ता चाहिए। जनता के द्वारा बार-बार नकारे जाने से हताश व निराश कांग्रेस कभी EVM पर तो कभी SIR पर प्रश्न खड़े करती है। देश की जनता का विश्वास और समर्थन खो चुकी कांग्रेस ने यह समझ लिया है कि लोकतांत्रिक तरीके से वह जन समर्थन हासिल कर सत्ता में नहीं आ पाएगी इसलिए उन्होंने अराजक और अलगाववादी शक्तियों को साथ लेकर भारत की लोकतंत्र को ही चुनौती देने का दुःसाहस शुरू किया है। राहुल गांधी देश की संवैधानिक संस्थानों पर प्रहार कर रिजिम चेंज का दिवास्वप्न देख रहे हैं।
राहुल गांधी द्वारा यह आरोप लगाना कि 13 करोड लोगों के नाम काट दिए गए हैं, बिल्कुल गलत है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि 13 करोड़ मतदाता को ASDD के रूप में चिन्हित किया गया है, इसमें लगभग 2.8 करोड़ मृत, 3 करोड़ अब्सेंट या अनट्रेसेबल, 6.3 करोड़ स्थायी रूप से स्थानांतरित और करीब 1 करोड़ दोहरी पंजीयन वाले पाए गए हैं ।
इसी प्रकार फॉर्म 6 के बदलाव के संदर्भ में लगाए गए आरोपों में भी कोई सच्चाई नहीं है। चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्त की सर्वसम्मति से SIR आर्डर जारी किया था, जिसमें डिक्लरेशन फार्म भी है । मतदाता की सुविधा के लिए फार्म 6 और घोषणा फार्म को एक साथ जोड़ा गया ताकि उन्हें अलग-अलग प्रकिया से न गुजरना पड़े । चुनाव आयोग भी स्पष्ट कर चुका है कि फार्म 6 में कोई बदलाव नहीं हुआ है। परंतु कांग्रेस द्वारा इस पर भी झूठी राजनीति की जा रही है तथा इस पर झूठे नैरेटिव को फैलाने का प्रयास किया जा रहा है।
कांग्रेस का इतिहास लोकतंत्रिक और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने का रहा है। वर्ष 1952 में कांग्रेस ने वामपंथियों के साथ मिलकर बाबासाहेब भीम राव अंबेडकर की चुनावी हार की साजिश रची थी। यह ऐतिहासिक तथ्य किसी से छुपा नहीं है। इसी प्रकार वर्ष 1957 में कांग्रेस ने बेगूसराय में बूथ कब्जा कर लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार किया था। बूथ पर कब्जा, मतपत्रों की लूट, बैलेट बाक्स में स्याही डालने जैसे कार्य कर निष्पक्ष चुनाव को बाधित करने में कांग्रेस कुख्यात रही है। आज जब चुनाव आयोग निष्पक्ष और विश्वसनीय मतदान को सुनिश्चित करने हेतु SIR कर रही है तो कांग्रेस अराजक आंदोलन के द्वारा दुष्प्रचार कर रही है। भारत की जागरूक जनता कांग्रेस के लोकतंत्र विरोधी चरित्र को जानती है। वह कांग्रेस के साजिश को कभी सफल नहीं होने देगी।
(लेखक झारखण्ड प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद हैं)


