12 दिनों तक वेंटिलेटर पर रही 9 वर्षीय बच्ची ने जीती जिंदगी की जंग, रिम्स के डॉक्टरों ने बचाई जान
रांची: रिम्स के चिकित्सकों ने गंभीर डायबिटिक इमरजेंसी और अचानक किडनी फेल्योर से जूझ रही 9 वर्षीय बच्ची का सफल इलाज कर उसे नया जीवन दिया है। बच्ची की हालत इतनी गंभीर थी कि उसे लगातार 12 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। वहीं, किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने के कारण चार बार डायलिसिस भी करना पड़ा। आखिरकार चिकित्सकों के अथक प्रयास से बच्ची की जान बचाने में सफलता मिली।
जानकारी के अनुसार, टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्ची को अत्यंत गंभीर अवस्था में रिम्स में भर्ती कराया गया था। वह खुद से सांस लेने में असमर्थ थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। इसके साथ ही उसकी किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर डायलिसिस के माध्यम से उपचार किया गया। इलाज के दौरान बच्ची को चार बार डायलिसिस से गुजरना पड़ा।
लगातार 12 दिनों तक चले गहन उपचार और चिकित्सकों की विशेष निगरानी के बाद बच्ची की स्थिति में सुधार होने लगा। अब वह बिना वेंटिलेटर के सामान्य रूप से सांस ले रही है और खुद भोजन भी कर रही है। फिलहाल इंसुलिन के माध्यम से उसके ब्लड शुगर को नियंत्रित किया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, बच्ची की हालत स्थिर है और जल्द ही उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।
इस जटिल उपचार में शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. (प्रो.) पीके चौधरी के मार्गदर्शन में नेफ्रोलॉजी विभाग की डॉ. प्रज्ञा पंत, डॉ. उत्कर्ष मिश्रा और पूरी चिकित्सा टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बच्ची के परिजनों ने रिम्स के चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति आभार जताया। रिम्स की यह सफलता गंभीर मरीजों के उपचार में चिकित्सा टीम की विशेषज्ञता, समर्पण और मानवीय संवेदनशीलता को दर्शाती है।



