भागलपुर की सड़कों पर दौड़ रहे 65 हजार प्रदूषण,फेल वाहन, सांस संबंधी रोगों से कराह रहे राहगीर
भागलपुर। सड़कों पर दौड़ने वाली गाड़ियां वायु प्रदूषण के सबसे प्रमुख कारणों में से एक हैं। परिवहन विभाग द्वारा इन पर नकेल कसने के लिए अभियान भी चलाए जाते हैं, इसके बाद भी प्रदूषण फेल वाहन सड़कों पर दौड़ते नजर आते हैं। परिवहन विभाग द्वारा सख्ती दिखाते हुए हर दिन ऐसे वाहनों पर कार्रवाई तो की जा रही है। लेकिन वाहन मालिक सचेत नहीं हो रहे हैं। राहगीर सांस की बीमारी से परेशान हो रहे हैं। फेफड़ों में थोक में जहर प्रवेश कर रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भागलपुर परिवहन विभाग द्वारा हर दिन करीब 80 से अधिक गाड़ियों को प्रदूषण फेल के मामले में पकड़ा जा रहा है, जिन पर जुर्माना भी लगाया जा रहा है। इसके बावजूद भी जिले की सड़कों पर परिवहन डैशबोर्ड के मुताबिक 65,025 वाहन प्रदूषण फेल हैं। परिवहन डैशबोर्ड के मुताबिक वर्ष 2025 में अब तक 19,388 पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जिले में जारी किए गए हैं, जिससे 6 लाख 91 हजार 615 रुपए की रेवेन्यू आई है। जिले में वर्तमान समय में 9 पॉल्यूशन केंद्र हैं, जहां से पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जारी होता है।
मोटरयान निरीक्षक ने बताया कि 65,025 में ऐसे भी वाहन होंगे जो ऑफ रोड होंगे। साथ ही उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग की टीम द्वारा इस जांच में और तेजी लाई जाएगी। ज्यादा से ज्यादा लोग पॉल्यूशन सर्टिफिकेट बनकर ही अपने वाहन को सड़क पर चलाएं।
जिले में पाल्यूशन फेल गाड़ियों की स्थिति पर जरा गौर करें तो और भी भयावह स्थिति सामने आती है ।
- पॉल्यूशन डिफॉल्टर वाहन: 65025
- जिले में कुल रजिस्टर्ड वाहन: 403477
- इस साल पॉल्यूशन सर्टिफिकेट से आई राशि: 691615
- कुल पॉल्यूशन केंद्र: 9
इस वर्ष अब तक जारी पॉल्यूशन सर्टिफिकेट
- जनवरी – 297940
- फरवरी – 194350
- मार्च – 199325
2024 की स्थिति
- कुल पॉल्यूशन सर्टिफिकेट इश्यू: 84813
- कुल आमदनी: 3061490
@ मोटरयान निरीक्षक एस एन मिश्रा कहते हैं ने बताया कि परिवहन विभाग द्वारा जिले भर में लगातार गाड़ियों की जांच की जा रही है, जिसमें औसतन 80 से अधिक गाड़ियां जांच में पॉल्यूशन फेल पाई जाती है। इन गाड़ियों पर जुर्माना भी लगाया जा रहा है। इसके बावजूद भी लोग सतर्क नहीं हो रहे हैं।
((((( बॉक्स खबर )))))
वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण के कारण कई प्रकार की बीमारियाँ हो सकती हैं। इनमें से कुछ प्रमुख बीमारियाँ निम्नलिखित हैं।
श्वसन संबंधी बीमारियां
- अस्थमा : वाहनों से निकलने वाले प्रदूषणकारी तत्वों के कारण अस्थमा की समस्या हो सकती है।
- ब्रोंकाइटिस : वाहनों के प्रदूषण से ब्रोंकाइटिस की समस्या हो सकती है, जिसमें फेफड़ों की वायु नलिकाएं सूज जाती हैं।
- निमोनिया : वाहनों के प्रदूषण से निमोनिया की समस्या हो सकती है, जिसमें फेफड़ों में संक्रमण होता है।
हृदय संबंधी बीमारियां
- हृदय रोग : वाहनों के प्रदूषण से हृदय रोग की समस्या हो सकती है, जिसमें हृदय की धमनियां संकुचित हो जाती हैं।
- उच्च रक्तचाप : वाहनों के प्रदूषण से उच्च रक्तचाप की समस्या हो सकती है, जिसमें रक्तचाप बढ़ जाता है।
त्वचा संबंधी बीमारियां
- त्वचा कैंसर : वाहनों के प्रदूषण से त्वचा कैंसर की समस्या हो सकती है, जिसमें त्वचा की कोशिकाएं कैंसरग्रस्त हो जाती हैं।
- त्वचा की एलर्जी : वाहनों के प्रदूषण से त्वचा की एलर्जी की समस्या हो सकती है, जिसमें त्वचा पर दाने और खुजली होती है।
अन्य बीमारियां
- मानसिक तनाव : वाहनों के प्रदूषण से मानसिक तनाव की समस्या हो सकती है, जिसमें व्यक्ति को चिंता, अवसाद और अनिद्रा की समस्या होती है।
- प्रजनन संबंधी समस्याएं : वाहनों के प्रदूषण से प्रजनन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि बांझपन और गर्भपात।
- न्यूरोलॉजिकल समस्याएं : वाहनों के प्रदूषण से न्यूरोलॉजिकल समस्याएँ हो सकती हैं, जैसे कि पार्किंसंस रोग और अल्जाइमर रोग।
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