छठ महापर्व पर घर लौटने को बेताब बिहारियों का दर्द बयां करते हुए खेसारी लाल यादव ने सरकार से लगाई गुहार – बोले, ‘तनी रहम करी महाराज!’
प्रदीप विद्रोही,पटना/भागलपुर। लोक आस्था के महापर्व छठ की आहट के साथ ही देश के अलग-अलग राज्यों में रह रहे बिहारियों के मन में अपनी माटी, अपने गांव और परिवार के बीच लौटने की तड़प बढ़ने लगी है। लेकिन ट्रेनों में टिकटों की भारी किल्लत और हवाई जहाज के आसमान छूते किराये ने लाखों प्रवासियों की घर वापसी की राह मुश्किल कर दी है। इसी पीड़ा को भोजपुरी के चर्चित गायक एवं अभिनेता खेसारी लाल यादव ने अपनी भावुक अपील के जरिए आवाज दी है।
खेसारी लाल यादव ने अपने फेसबुक और एक्स अकाउंट पर केंद्र एवं राज्य सरकार से मार्मिक गुहार लगाते हुए लिखा, ‘Dear केंद्र और राज्य Sarkar, तनी रहम करी महाराज!’ उन्होंने कहा कि छठ पूजा में हर पूर्वांचली का सपना होता है कि वह अपने गांव पहुंचे, अपनी मां के साथ छठ मनाए और अपनी मिट्टी की खुशबू के बीच इस महापर्व का हिस्सा बने। लेकिन मौजूदा हालात ऐसे हैं कि ट्रेनों में टिकट मिलना मुश्किल है और हवाई जहाज का किराया भी आग की तरह बढ़ गया है।
खेसारी ने सवाल उठाते हुए नम आंखों से कहा कि जब केंद्र और राज्य, दोनों जगह आपकी ही सरकार है, तो फिर बिहारियों की इस परेशानी का समाधान क्यों नहीं निकल रहा है? उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बिहार आने वाले प्रवासियों की भारी भीड़ को देखते हुए देश के अलग-अलग राज्यों से बिहार के लिए विशेष ट्रेनों का परिचालन शुरू किया जाए।
उन्होंने रेलवे के अधिकारियों से भी इस दिशा में जल्द पहल करने की अपील की। खेसारी ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की परेशानी का जिक्र करते हुए कहा कि जब हवाई जहाज का किराया इतना अधिक होगा, तो आखिर एक गरीब बिहारी कैसे अपने घर तक पहुंच पाएगा?
उनकी अपील में सिर्फ ट्रेन और टिकट की समस्या नहीं, बल्कि एक प्रवासी बिहारी का अपनी मां, अपनी मिट्टी और छठी मइया के प्रति गहरा भावनात्मक जुड़ाव भी झलकता है। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि ‘छठ माई, अपनी मां और अपनी माटी से बिहारियों को आने दीजिए। जल्दी एकर समाधान निकाली ये देवता। छठी माई बहुत दुआ दिहन।’
अंत में उन्होंने अपनी इस अपील को जनता की ओर से एक निहोरा बताते हुए लिखा – ‘निवेदक (निहोरा), राउर जनता।’ खेसारी लाल यादव की इस अपील ने छठ पर घर लौटने की उम्मीद लगाए बैठे उन लाखों प्रवासी बिहारियों की पीड़ा को सामने ला दिया है, जिनके लिए छठ महज एक त्योहार नहीं, बल्कि घर, परिवार, परंपरा और अपनी जड़ों से जुड़ने का सबसे बड़ा अवसर है। सवाल सिर्फ घर पहुंचने का नहीं, बल्कि उस आस्था का है जिसके लिए एक बिहारी हजारों किलोमीटर का सफर तय करके अपनी माटी तक लौटना चाहता है।



