एनडीए की कई सिटिंग सीटों पर नए चेहरों को फिट करने की कवायद शुरू, इस दायरे में कौन – कौन ?
भागलपुर। राजनीति में लंबे समय तक टिके रहना बड़ी बात नहीं होती, बड़ी बात होती है – संभलकर टिके रहना। भागलपुर जिले में एनडीए के कई सिटिंग चेहरे अपनी अराजक कार्यशैली के कारण पार्टी के कोपभाजन बन चुके हैं। इस चक्रव्यूह में गोपालपुर से जेडीयू विधायक नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल के फंसने की चर्चा पटना के गलियारे में अब उड़ने लगी है। हम अपने पैकेट में टिकट लेकर चलते हैं का दावा ठोक ने वाले जेडीयू विधायक गोपाल मंडल इस बार अपनी ही अराजक शैली के चक्रव्यूह में फंसते नजर आ रहे हैं। यूं कहें सबसे ऊपर है। एनडीए के कुछ और सिटिंग चेहरों के नाम भी इसी श्रेणी में शीर्ष नेतृत्व की फाइलों में दर्ज हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि यह पिटारा आखिरी समय में खोला जाएगा।
कभी ट्रेन में अर्धनग्न होकर घूमना, कभी मंच पर बार बालाओं संग ठुमके लगाना, गाल पर नोट चिपकाना, तो कभी अपने ही सांसद को अपशब्द कहना – इन सभी घटनाओं ने न सिर्फ उन्हें विवादों में डाला, बल्कि पार्टी की छवि को भी नुकसान पहुंचाया। अब यही करतूतें उनका टिकट मांग रही हैं। “मैं टिकट पैकेट में लेकर चलता हूं” कहने वाले गोपाल मंडल इस बार अपनी ही अराजक शैली में उलझते दिख रहे हैं। पिछले चार टर्म से लगातार विधायक रहे गोपाल मंडल अब पार्टी के निशाने पर हैं।
पार्टी के ताज़ा आंतरिक सर्वे में गोपाल मंडल का जनाधार खिसकता पाया गया है। इतना खिसका है कि पार्टी आलाकमान अब नए विकल्प तलाशने में जुट गया है। साफ है – 2004 से गोपालपुर सीट पर काबिज़ रहे गोपाल मंडल को जनता ने हर बार भारी जनादेश दिया। लेकिन बदले में जनता को क्या मिला? तमाशा, विवाद और बेतुकी बयानबाज़ी।
अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में भी यह सवाल गूंजने लगा है कि क्या एक ‘टिकटधारी तमाशबीन’ को फिर से मौका दिया जाए? पार्टी सूत्रों के अनुसार, गोपाल मंडल की ‘अराजक शैली’ अब पार्टी की नीतियों से मेल नहीं खा रही है। सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही जेडीयू अब ‘बेदाग छवि’ वाले चेहरों की तलाश में है। और गोपाल मंडल? वे अब पार्टी के लिए पोस्टर बॉय कम, पोस्टर फाड़ू ज़्यादा बन चुके हैं।
सर्वे रिपोर्ट ने और भी चौंकाया है: लोगों ने खुलकर कहा – “नेता ऐसा चाहिए जो इलाके की बात करे, विकास की बात करे, न कि वायरल वीडियो का सिरमौर बने।” राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो जेडीयू और एनडीए – दोनों में इस बार एक “साफ-सफाई अभियान” चल रहा है। पुराने और विवादास्पद चेहरों की छंटनी तय मानी जा रही है। सूत्रों की मानें तो एनडीए के कुछ और सिटिंग चेहरे भी शीर्ष नेतृत्व की फाइलों में दर्ज हैं, और इन पर फैसला आखिरी समय में होगा।
अब सबसे बड़ा सवाल:क्या गोपाल मंडल अपनी राजनीति का ‘फाइनल शो’ देने जा रहे हैं? या फिर अंतिम समय में कोई ‘पलटवार’ करेंगे? क्या निर्दलीय या किसी अन्य दल से टिकट का जुगाड़ कर पाएंगे? और अगर जेडीयू से टिकट नहीं मिला, तो क्या गोपाल मंडल निर्दलीय चुनाव लड़कर सफल हो पाएंगे? ऐसे कई सवाल इस चुनावी माहौल में तैरने लगे हैं। फिलहाल पार्टी के गलियारों में हलचल है, लेकिन इस हलचल के बाद आने वाले तूफ़ान का अंदेशा सबको हो चला है।



